मथुरा, उत्तर प्रदेश: मथुरा की सांसद, प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री और केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान की ब्रांड एंबेसडर, श्रीमती हेमा मालिनी ने 5 जून, 2025 को पंडित दीन दयाल धाम, फरह में आयोजित “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि और पशुपालन क्षेत्र में नवाचार, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम की शुरुआत जलभरो कार्यक्रम और परिषद के गीत से हुई। इसके उपरांत, केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली ने मुख्य अतिथि श्रीमती हेमा मालिनी और अन्य विशिष्ट अतिथिगण का पटुका पहनाकर स्वागत किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार गौड़, दीन दयाल शोध संस्थान, फरह मथुरा के निदेशक श्री सोनपाल जी, केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली, कृषि विभाग मथुरा के उपनिदेशक डॉ. राजीव पाहवा, कृषि विज्ञान केंद्र मथुरा के प्रभारी डॉ. वाई. के. शर्मा, और दुवासु, मथुरा के निदेशक प्रसार डॉ. अतुल सक्सैना ने सहभागिता की। बड़ी संख्या में किसानों, बकरी पालकों, वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।
सांसद हेमा मालिनी का संबोधन: किसान को उद्यमी बनाने का आह्वान

सांसद श्रीमती हेमा मालिनी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयोजकों को धन्यवाद दिया और इसे एक महत्वपूर्ण तथा जन-कल्याणकारी प्रयास बताया। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, मखदूम, दुवासु मथुरा, कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विभाग, मथुरा और दीन दयाल धाम के विशिष्ट प्रतिनिधियों का अभिनंदन किया, जिन्होंने किसान और वैज्ञानिकों के बीच सीधे संवाद का मंच तैयार किया। उन्होंने कहा कि यह दोतरफा संवाद अनुसंधान को जमीनी सच्चाई से जोड़ने का कार्य करेगा।
श्रीमती मालिनी ने केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम, मथुरा, कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र, मथुरा द्वारा मथुरा और हाथरस के 270 गांवों में किसानों से सीधा संवाद स्थापित करने के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि बकरी, जिसे “गरीब की गाय” कहा जाता है, वास्तव में ग्रामीण स्वरोजगार और पोषण सुरक्षा का सशक्त माध्यम बन सकती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और बाज़ार सुविधा मिलने पर किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि एक सफल उद्यमी भी बन सकता है।
‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ का उद्देश्य

केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चेटली ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि भारत का मेरुदंड है और किसान उसकी धड़कन। उन्होंने जोर दिया कि आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर देश के लिए यह आवश्यक है कि कृषि और पशुपालन पद्धतियां वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी बनें। ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ का यह चरण खरीफ की फसल की तैयारी पर आधारित है।
यह देशव्यापी अभियान भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी द्वारा अनुमोदित है। इस अभियान में 2000 से अधिक वैज्ञानिकों के दल 700 जिलों में लगभग 1.5 करोड़ किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं का निराकरण कर रहे हैं। केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम, मथुरा, कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र, मथुरा द्वारा मथुरा और हाथरस के 270 गांवों में किसानों से सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
व्हे और बकरी के दूध से बने साबुन का विमोचन

कार्यक्रम में सांसद हेमा मालिनी ने केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के व्हे (whey) और बकरी के दूध से बने हुए साबुन का विमोचन किया। उन्होंने किसानों और उपस्थित आम नागरिकों को इसकी उपयोगिता के बारे में भी बताया।
इस अवसर पर कृषि तकनीक, बकरी पालन, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं पर विचार-विमर्श एवं प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए। केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम द्वारा चलाए जा रहे विकसित कृषि संकल्प अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. अनुपम कृष्ण दीक्षित ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

