कुंभ मेला 2025: जाने से पहले जानिए पूरी जानकारी, क्या पास की जरूरत है, कितने किलोमीटर पैदल चलना होगा, और क्या होगा सिस्टम

Dharmender Singh Malik
5 Min Read

नई दिल्ली: भारत का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन, महाकुंभ मेला, हर 12 साल में आयोजित किया जाता है और लाखों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं। कुंभ मेला 2025 का आयोजन 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज में होगा, जहां देश-विदेश से लाखों लोग पवित्र संगम में स्नान करने के लिए पहुंचेंगे। यदि आप भी इस अवसर पर कुंभ मेले में शामिल होने का सोच रहे हैं, तो आपके मन में कई सवाल हो सकते हैं। क्या आपको कुंभ में जाने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना होगा? वहां कितने किलोमीटर पैदल चलना होगा? किस रास्ते से जाएं और कहां रुकें? इन सभी सवालों का हम आपको यहां जवाब दे रहे हैं।

कब से कब तक रहेगा कुंभ मेला?

कुंभ मेला 2025 का आयोजन 13 जनवरी से 26 फरवरी तक होगा। इस दौरान 6 शाही स्नान होंगे, जब कुंभ मेले में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से कहीं ज्यादा होगी। शाही स्नान की तिथियां निम्नलिखित हैं:

  • पहला शाही स्नान: 13 जनवरी 2025
  • दूसरा शाही स्नान: 14 जनवरी 2025 (मकर संक्रांति)
  • तीसरा शाही स्नान: 29 जनवरी 2025 (मौनी अमावस्या)
  • चौथा शाही स्नान: 2 फरवरी 2025 (बसंत पंचमी)
  • पांचवां शाही स्नान: 12 फरवरी 2025 (माघ पूर्णिमा)
  • आखिरी शाही स्नान: 26 फरवरी 2025 (महाशिवरात्रि)
See also  Agra News: 5 अक्टूबर को विहिप और बजरंग दल निकालेगा शौर्य जगारण यात्रा

कुंभ मेला क्षेत्र का विभाजन

कुंभ मेला क्षेत्र को 4 जोन में बांटा गया है: फाफामऊ, अरैल, परेड और झूंसी। इन जोनों में 25 सेक्टर बनाए गए हैं। प्रत्येक जोन में अलग-अलग प्रवेश द्वार होंगे और श्रद्धालुओं को इन जोनों में प्रवेश करने के लिए निर्देशित किया जाएगा। यदि आप प्रयागराज शहर से कुंभ में जा रहे हैं, तो आपको परेड जोन से प्रवेश मिलेगा।

क्या रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है?

कुंभ मेला में स्नान करने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक नहीं है। कुछ वेबसाइट्स रजिस्ट्रेशन की सुविधा देती हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसका कोई आदेश नहीं है। आप सीधे प्रयागराज जाकर कुंभ में स्नान कर सकते हैं।

ट्रेन से कुंभ कैसे पहुंचे?

अगर आप ट्रेन से प्रयागराज जाना चाहते हैं, तो यहां 9 प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं, जिनके जरिए आप आसानी से पहुंच सकते हैं:

  1. प्रयागराज जंक्शन (PRYJ)
  2. प्रयागराज रामबाग (PRRB)
  3. प्रयागराज संगम (PYG)
  4. नैनी जंक्शन (NYN)
  5. प्रयागराज छिवकी (PCOI)
  6. फाफामऊ जंक्शन (PFM)
  7. झूंसी (JI)
  8. सूबेदारगंज (SFG)
See also  शीतलहर के चलते किया कम्बल वितरण

इन स्टेशनों से आपको संगम तक पहुंचने के लिए शटल बसों या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना होगा।

बस से कैसे जाएं?

प्रयागराज के प्रमुख बस अड्डों से भी आप कुंभ स्थल तक पहुंच सकते हैं। आपको कचहरी बस अड्डा, झूंसी, सरस्वती द्वार, बेली/बेला कछार आदि से जाना होगा। आप अपनी सुविधा के अनुसार इन स्टेशनों से बस ले सकते हैं।

खुद की गाड़ी से जाएं तो क्या करना होगा?

अगर आप अपनी गाड़ी से प्रयागराज आ रहे हैं, तो संगम के आसपास पार्किंग की व्यवस्था की गई है। संगम क्षेत्र से 4 से 15 किलोमीटर की दूरी पर पार्किंग स्थल हैं। शाही स्नान के दिन गाड़ियों को रोका जा सकता है, इसलिए आपको पहले से अपने गाड़ी पार्क करने की जगह का चुनाव करना होगा।

कितना पैदल चलना होगा?

कुंभ मेला के दौरान शाही स्नान और सामान्य दिन के लिए पैदल चलने की दूरी अलग-अलग हो सकती है। शाही स्नान के दिन आपको सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा पैदल चलना पड़ सकता है, जो 10 किलोमीटर तक हो सकता है। अन्य दिनों में यह दूरी 4-5 किलोमीटर हो सकती है। प्रशासन की ओर से भीड़ नियंत्रण के लिए व्यवस्था में बदलाव किए जा सकते हैं।

See also  UP Crime News: बारात देखना बना गुनाह, पूर्व विधायक के परिवार पर हमला, पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप

फ्लाइट से कुंभ कैसे पहुंचें?

प्रयागराज हवाई अड्डा शहर से 13 किलोमीटर दूर बमरौली में स्थित है। यहां से आपको सामान्य सड़क मार्ग का चयन करना होगा और संगम तक पहुंचने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना होगा।

क्या कुंभ में टेंट बुक करना जरूरी है?

कुंभ मेला में टेंट बुक करना जरूरी नहीं है, लेकिन संगम के करीब टेंट सिटी बनाई जाती है, जहां आप ठहर सकते हैं। इसके अलावा, आप होटल, धर्मशाला, होमस्टे आदि में भी रुक सकते हैं। टेंट सिटी में रुकने से आपको संगम तक पहुंचने में आसानी होती है। यदि आप टेंट बुक करना चाहते हैं तो आप यूपीएसटीडीसी की आधिकारिक वेबसाइट से बुकिंग कर सकते हैं।

क्या और किया जा सकता है?

कुंभ मेला में आप अखाड़ों के दर्शन कर सकते हैं और वहां के अघोरी साधुओं के पास जा सकते हैं। इसके लिए यूपी टूरिज्म की ओर से अलग-अलग टूर पैकेज दिए गए हैं, जिनकी कीमत 2000 रुपये से शुरू होती है।

See also  ज्ञानवापी वजूखाना सर्वे मामला: हाई कोर्ट में सुनवाई टली, विवाद गहराया
Share This Article
Editor in Chief of Agra Bharat Hindi Dainik Newspaper
Leave a comment