अब खबर नहीं, न्योता मिलेगा- पुलिस ग्रुप का बदला हुआ एजेंडा
अंबेडकर नगर | कभी पुलिस के सराहनीय कार्यों और “गुड वर्क” की जानकारी देने के लिए बनाया गया व्हाट्सएप ग्रुप अब धीरे-धीरे एक नए स्वरूप में ढलता नजर आ रहा है। अब इसमें अपराध नियंत्रण या कानून-व्यवस्था से ज्यादा महत्व व्यक्तिगत कार्यक्रमों को मिलता दिख रहा है।
अपराध की खबर कम, रामायण पाठ का न्योता ज्यादा- पुलिस ग्रुप का नया रूप!
ताजा उदाहरण अकबरपुर कोतवाली से सामने आया है, जहां लंबे समय से कुर्सी संभाल रहे प्रभारी साहब ने अपने रामायण पाठ के आयोजन की सूचना भी उसी ग्रुप में प्रसारित कर दी, जिसमें पत्रकारों को पुलिस की आधिकारिक गतिविधियों की जानकारी दी जानी चाहिए। इतना ही नहीं, पत्रकारों को बाकायदा इस धार्मिक आयोजन में आमंत्रित भी किया गया- मानो यह कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस हो!
सूचना का मंच या संबंधों का मंच? पुलिस ग्रुप की बदलती प्राथमिकताएं?
अब सवाल यह उठता है कि क्या “गुड वर्क” की परिभाषा बदल चुकी है, या फिर यह ग्रुप धीरे-धीरे पर्सनल पीआर मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म में तब्दील हो रहा है? अगर यही सिलसिला चलता रहा, तो आने वाले समय में शायद जन्मदिन, गृह प्रवेश और पारिवारिक समारोहों के निमंत्रण भी इसी माध्यम से मिलने लगें-और पत्रकारों को कवर करने के लिए नई “बीट” भी मिल जाए!
पत्रकारों के बीच यह चर्चा आम हो चली है कि अगर आधिकारिक प्लेटफॉर्म का उपयोग इसी तरह निजी प्रचार के लिए होता रहा, तो इसकी विश्वसनीयता और उद्देश्य दोनों पर प्रश्नचिह्न लगना तय है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस “नवाचार” को प्रोत्साहित करते हैं या फिर व्हाट्सएप ग्रुप को उसके मूल उद्देश्य—जनहित और कानून-व्यवस्था की जानकारी- तक सीमित रखने की पहल करेंगे।
