एटा। जनपद के कस्बा जैथरा में शिक्षा व्यवस्था बिल्कुल चौपट होती नजर आ रही है। यहां संचालित निजी विद्यालयों में प्रबंधकों की मनमानी इस कदर हावी है कि अभिभावकों की जेब पर सीधा डाका डाला जा रहा है। निजी पाठ्यक्रमों और महंगी किताबों के नाम पर 70 प्रतिशत तक कमीशन का खेल खुलेआम चल रहा है, जिससे अभिभावक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि जैथरा के दर्जनों स्कूलों में एनसीईआरटी के निर्धारित पाठ्यक्रम को दरकिनार कर निजी प्रकाशकों की किताबें लागू कराई जा रही हैं। इन किताबों की कीमत बाजार दर से कहीं अधिक होती है और स्कूल प्रबंधन द्वारा तय दुकानों से ही खरीदने का दबाव बनाया जाता है। सूत्रों के अनुसार, इन किताबों पर स्कूल संचालकों को 50 से 70 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन मिलता है।
अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा के नाम पर खुली ये दुकानें अब लोगों के आर्थिक शोषण का केंद्र बन चुकी हैं। यहां हर साल बिना किसी कारण के किताबें बदल दी जाती हैं, जिससे पुरानी किताबें बेकार हो जाती हैं और अभिभावकों को नए सिरे से हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बोझ किसी मुसीबत से कम नहीं है। कई अभिभावकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यदि वे तय दुकान से किताबें नहीं खरीदते, तो बच्चों पर दबाव बनाया जाता है।
वहीं, शिक्षा विभाग की गाइडलाइंस में स्पष्ट निर्देश हैं कि विद्यालयों को एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को प्राथमिकता देनी चाहिए और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं डालना चाहिए। इसके बावजूद जैथरा में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
लोगों का कहना है कि यह पूरा खेल स्कूल प्रबंधन, निजी प्रकाशकों और कुछ बुक विक्रेताओं की मिलीभगत से संचालित हो रहा है। शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत को व्यवसाय बनाकर मोटी कमाई की जा रही है, जिससे बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।
अब अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो ऐसी व्यवस्था से लोगों का भरोसा उठना तय माना जा रहा है।
निरीक्षण टीम कभी भी दे सकती है दस्तक –
जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह ने निजी विद्यालयों की मनमानी पर सख्ती दिखाते हुए निरीक्षण टीम गठित कर दी है। इस टीम में जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य और खंड शिक्षा अधिकारी शामिल हैं।
टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित विद्यालयों का औचक निरीक्षण करें। अवागढ़ से लेकर अलीगंज तक स्कूलों की जांच की जा रही है।
निरीक्षण के दौरान एनसीईआरटी पाठ्यक्रम का पालन, किताबों की बिक्री, मनमानी फीस और अभिभावकों पर डाले जा रहे आर्थिक बोझ की विशेष रूप से जांच की जाएगी।
प्रशासन ने साफ किया है कि गड़बड़ी मिलने पर इसे विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में स्कूल प्रबंधनों में हड़कंप मचा हुआ है।
