आगरा, (उत्तर प्रदेश): पुलिस भर्ती परीक्षा में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें एक युवक ने वर्दी पहनने के बाद फिंगर प्रिंट के माध्यम से अपनी धोखाधड़ी का पर्दाफाश करवाया। आरोप है कि इस युवक ने परीक्षा में साल्वर की मदद ली थी और अपनी जगह किसी अन्य व्यक्ति से परीक्षा दिलवाई थी। फिंगर प्रिंट ब्यूरो की जांच रिपोर्ट आने के बाद पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के इंस्पेक्टर ने सिकंदरा थाने में आरोपी युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
घटना की पूरी जानकारी
आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में 2020-21 में आयोजित एक महत्वपूर्ण पुलिस भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े का यह मामला सामने आया है। आरोपित युवक, जिसका नाम निर्भय सिंह जादौन है, बुलंदशहर का रहने वाला है। इस युवक का सेंटर आगरा के सिकंदरा क्षेत्र के यश इंफोटेक ऑनलाइन एग्जामिनेशन सेंटर, लाइफ लाइन पब्लिक स्कूल में था। इस परीक्षा में वह उप निरीक्षक के पद के लिए चयनित हुआ था और उसे प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था।
पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के इंस्पेक्टर सत्येंद्र कुमार ने तहरीर दी थी, जिसके आधार पर सिकंदरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। जांच के दौरान पता चला कि निर्भय सिंह जादौन के फिंगर प्रिंट परीक्षा के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे थे, जिसके बाद यह आशंका जताई गई कि आरोपित ने परीक्षा में किसी और को अपना स्थानांतरित करने के लिए साल्वर की मदद ली थी।
फिंगर प्रिंट से खुला फर्जीवाड़ा

इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब फिंगर प्रिंट ब्यूरो की रिपोर्ट में यह सामने आया कि निर्भय सिंह जादौन के अंगूठे का प्रिंट ऑनलाइन परीक्षा, डीवी-पीएसटी (Document Verification and Physical Standard Test) और शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान लिए गए अंगूठे के चिह्न से मेल नहीं खा रहा था। इससे यह स्पष्ट हो गया कि परीक्षा में किसी अन्य व्यक्ति ने उसकी जगह परीक्षा दी थी।
सूत्रों के अनुसार, निर्भय सिंह जादौन ने खुद परीक्षा में भाग नहीं लिया था, बल्कि उसके स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति ने लिखित परीक्षा में भाग लिया था।
न्यायालय का आदेश और जांच की प्रक्रिया
संदीप परिहार और अन्य 28 लोगों द्वारा दाखिल की गई रिट के बाद उच्च न्यायालय ने मामले की जांच करने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद, एक समिति गठित की गई, जिसने 13 अक्टूबर 2023 को फिंगर प्रिंट ब्यूरो को जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज भेजे। इसके बाद फिंगर प्रिंट ब्यूरो ने जांच पूरी की और रिपोर्ट को 20 नवंबर 2024 को लखनऊ के हुसैनगंज थाने में दर्ज कराने के लिए भेजा।
पुलिस विभाग की कार्रवाई
पुलिस भर्ती बोर्ड के अधिकारियों ने इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को चुनौती देने वाला मामला है। इंस्पेक्टर नीरज कुमार ने बताया कि मुकदमा पहले लखनऊ के हुसैनगंज थाने में दर्ज किया गया था, क्योंकि प्रारंभिक जांच वहीं से शुरू हुई थी, लेकिन अब इसे सिकंदरा थाने में ट्रांसफर कर दिया गया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।
घटनाक्रम का संक्षिप्त विवरण
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20 नवंबर 2021: ऑनलाइन परीक्षा संपन्न हुई।
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17 अप्रैल 2023: उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ द्वारा निर्णय दिया गया, जिसके बाद जांच समिति गठित की गई।
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13 अक्टूबर 2023: फिंगर प्रिंट ब्यूरो को जांच के लिए दस्तावेज भेजे गए।
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20 नवंबर 2024: लखनऊ के हुसैनगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई।
