आगरा, उत्तर प्रदेश: राजनगर, लोहामंडी निवासी राजेंद्र की पत्नी विंदेश ने लोहामंडी थाना पुलिस पर संगीन आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने उनके बेटे अभिषेक को तमंचा लगाकर एक झूठे मुकदमे में जेल भेज दिया है, जबकि मामला कुछ और ही था। इस घटना से आक्रोशित परिजन और क्षेत्रीय लोग अब न्याय के लिए उच्च अधिकारियों के पास गुहार लगा रहे हैं।
इंस्टाग्राम फोटो विवाद से शुरू हुआ मामला
विंदेश देवी के अनुसार, उनके बेटे अभिषेक का इलाके की एक लड़की के साथ इंस्टाग्राम पर फोटो को लेकर विवाद हो गया था। लड़की ने इस बात की शिकायत थाने में की, जिसके बाद महिला पुलिस ने अभिषेक को पुलिस लाइन स्थित काउंसलिंग ऑफिस बुलाया। काउंसलिंग के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि अभिषेक ने लड़की की फोटो अपने इंस्टाग्राम पर लगा ली थी। पुलिस के संज्ञान में मामला आने के बाद दोनों पक्षों को बुलाया गया और वहां उनका समझौता भी हो गया।
समझौते के बाद थाने लाकर फंसाने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि समझौते के बाद पुलिस अभिषेक को लोहामंडी थाने ले आई और परिवार से कहा कि उसे कुछ देर में छोड़ दिया जाएगा। परिजन देर रात तक इंतजार करते रहे, लेकिन अभिषेक को नहीं छोड़ा गया। अगली सुबह जब परिजन थाने पहुंचे, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। पुलिस ने बताया कि अभिषेक के पास से तमंचा बरामद हुआ है और उसे जेल भेजा जाएगा।

परिजनों ने पुलिस से बहुत मिन्नतें कीं और बताया कि मामला तो लड़की से समझौते का था, फिर यह तमंचे वाली बात कहां से आ गई? परिजनों के मुताबिक, पुलिस ने राजनगर जूता मंडी के पास अभिषेक को तमंचा लगाकर झूठे मुकदमे में जेल भेज दिया।
डीसीपी सिटी से शिकायत और जांच का आश्वासन
अभिषेक को झूठे मुकदमे में जेल भेजने पर परिजनों ने लोहामंडी थाना पुलिस की शिकायत डीसीपी सिटी से की है। डीसीपी सिटी ने उन्हें मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
इस पूरे प्रकरण से क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अभिषेक के परिजनों के साथ क्षेत्रीय लोग भी डीसीपी सिटी और अन्य उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाने पहुंचे हैं। सभी की निगाहें अब पुलिस जांच पर टिकी हैं कि क्या अभिषेक को सच में झूठे मुकदमे में फंसाया गया है या पुलिस का दावा सही है।
