फतेहपुर सिकरी, उत्तर प्रदेश: पुलिस भर्ती परीक्षा में बेटियों ने भी अपना लोहा मनवाया है। फतेहपुर सिकरी विकासखंड के चार गांवों में हुई पड़ताल में पुलिस भर्ती परीक्षा में चयनित हुए 24 अभ्यर्थियों में से 8 बेटियों ने सफलता प्राप्त की है। यह सफलता न केवल बेटियों की मेहनत और संघर्ष का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा भी करती है।
विकासखंड के चार गांवों में बेटियों की सफलता
फतेहपुर सिकरी के विकासखंड के ग्राम दूरा, जौताना, रसूलपुर और हंसपुरा में पुलिस भर्ती परीक्षा में चयनित हुए अभ्यर्थियों में बेटियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इन चार गांवों में कुल 24 अभ्यर्थियों ने सफलता प्राप्त की, जिनमें से 8 बेटियां हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ता से सफलता हासिल की।
- ग्राम दूरा: यहां 12 अभ्यर्थियों में से 3 बेटियां सफल हुई हैं – संगीता, सलोनी, और ललिता।
- ग्राम जौताना: इस गांव में 6 अभ्यर्थियों में से 3 बेटियां सफल हुई हैं – प्रिया सिंह, क्रांति कुशवाह, और आरती खेनवार।
- ग्राम रसूलपुर: यहां 5 अभ्यर्थियों में से 2 बेटियां सफल हुई हैं – नेहा राजपूत और सुमन।
- ग्राम हंसपुरा: इस गांव में एक अभ्यर्थी, पुष्पेंद्र पाराशर, सफल हुआ है।
प्रिया सिंह का अनुभव
ग्राम जौताना की प्रिया सिंह ने इस सफलता को अपनी निरंतर मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने बताया कि उन्हें प्रदेश में 648वीं रैंक और लड़कियों में 23वीं रैंक प्राप्त हुई है। उनका कहना था, “सफलता निरंतर प्रयास से ही मिलती है। मैंने कभी हार नहीं मानी और हमेशा अपनी मेहनत पर विश्वास रखा।”
क्रांति कुशवाह का संघर्ष
जोताना की क्रांति कुशवाह ने बताया कि वह उच्च विद्यालय से लेकर ग्रेजुएशन तक सभी परीक्षाओं में प्रथम श्रेणी से पास हुई हैं। क्रांति ने कहा, “मैं घर में छठवीं संतान हूं, और घर में रहकर ही लाइब्रेरी में पढ़ाई करके यह सफलता हासिल की।” उनकी कड़ी मेहनत और संघर्ष ने यह साबित कर दिया कि किसी भी परिस्थिति में अगर दृढ़ संकल्प हो, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।
आरती खेनवार की मेहनत
जोताना की ही आरती खेनवार ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी सेल्फ स्टडी और माता-पिता तथा परिजनों के मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा, “मैंने पूरी तरह से मन लगाकर पढ़ाई की और मेरे परिवार के समर्थन से मैंने यह सफलता प्राप्त की है।”
समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम
फतेहपुर सिकरी विकासखंड के गांवों में बेटियों की सफलता इस बात का प्रतीक है कि अब समाज में बेटियों को भी समान अवसर मिल रहे हैं। यह सफलता न केवल व्यक्तिगत स्तर पर अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि पूरे समाज में एक संदेश भेजने का काम करती है।