शिव जन सेवा केंद्र के बाद अब मधुर जन सेवा केंद्र का कारनामा आया सामने
सौदेबाजी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा
जैथरा,एटा। क्षेत्र में आम लोगों की सुविधा के लिए खोले गए जन सेवा केंद्र अब धीरे-धीरे राजस्व कर्मियों के लिए सुविधा शुल्क वसूली का माध्यम बनते जा रहे हैं। हालात यह हैं कि जमीन से जुड़े कार्य बिना अतिरिक्त भुगतान के आगे बढ़ने का नाम नहीं ले रहे। शिव जन सेवा केंद्र में सौदेबाजी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब मधुर जन सेवा केंद्र से जुड़ा एक नया प्रकरण सामने आ गया है।
नया मामला जैथरा क्षेत्र के गांव निवासी रामशरण से जुड़ा है। पीड़ित का कहना है कि मां के निधन के बाद उसने जमीन पर अपना नाम दर्ज कराने के लिए लेखपाल से संपर्क किया। आरोप है कि नामांतरण के सामान्य कार्य को कराने के लिए लेखपाल ने केंद्र संचालक के जरिए सुविधा शुल्क की मांग रख दी। तय रकम मिलने के बाद ही फाइल आगे बढ़ी और काम कराया गया।
पीड़ित राम शरण के अनुसार मधुर जन सेवा केंद्र के संचालक के माध्यम से लेखपाल रोहित कुमार चौधरी ने नामांतरण के बदले साढ़े सात हजार रुपये की राशि वसूली। रकम देने के बाद ही लेखपाल ने कागजी कार्रवाई पूरी की। पीड़ित का कहना है कि यदि पैसे नहीं दिए जाते तो बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद फाइल नहीं बढ़ती।
गौरतलब है कि यही लेखपाल इससे पहले शिव जन सेवा केंद्र से जुड़े इसी तरह के सौदेबाजी के आरोपों को लेकर चर्चा में हैं। उस मामले की जांच चल ही रही है ,कि दूसरा आरोप सामने आ जाने से सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि जन सेवा केंद्र अब जनता की सुविधा के बजाय रिश्वत के अड्डे बनते जा रहे हैं।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि लेखपाल और जन सेवा केंद्र संचालकों के बीच आपसी तालमेल से कार्यों की दरें तय होती हैं। किसान या जरूरतमंद अगर बिना भुगतान के काम कराने की बात करता है तो उसकी फाइल महीनों तक अटकी रहती है। मजबूरी में लोग पैसे देने को विवश होते हैं।
एक के बाद एक मामले सामने आने के बाद राजस्व विभाग में हलचल मची हुई है। कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो जन सेवा केंद्रों का असल मकसद ही खत्म हो जाएगा।
अब सवाल यह है कि शिव जन सेवा केंद्र के बाद मधुर जन सेवा केंद्र से जुड़ा यह मामला सामने आने के बाद प्रशासन कितनी गंभीरता दिखाता है। यदि समय रहते सख्ती नहीं की गई तो जन सेवा केंद्रों की साख पर बट्टा लगना तय माना जा रहा है। इस व्यवस्था को लेकर आम लोगों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
