अलीगंज,एटा |
जनपद एटा के अलीगंज स्थित गौतम बुद्ध इंटर कॉलेज, जो कभी शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था, अब भ्रष्टाचार और व्यावसायिक हितों का अड्डा बनता जा रहा है। कॉलेज परिसर की जिस जमीन पर कभी छात्रों की कक्षाएं चला करती थीं, वहां अब दुकानों का निर्माण तेज़ी से हो रहा है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस पूरे मामले में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई है। अगर जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए, तो शिक्षा के इस मंदिर को बचाया जा सकता है। करोड़ो रुपयों का भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है।
शिक्षा का केंद्र में लिख दी भ्रष्टाचार की कहानी
कॉलेज की इमारत, जिसे कभी इलाके के प्रबुद्धजनों ने बच्चों की शिक्षा के लिए खड़ा किया था, आज मुनाफे की होड़ में तब्दील हो चुका है। निर्माण कार्य बिना किसी सार्वजनिक सूचना या कानूनी प्रक्रिया के शुरू कर दिया गया, खुले आम निर्माणाधीन दुकानों की खरीद फरोख्त की जा रही है। अलीगंज क्षेत्र के लोगों के लिए शिक्षा का यह केंद्र इस तरह बर्बाद होगा, शायद ही किसी ने इस बात की कल्पना की होगी।
डॉ. मुंशीलाल शाक्य ने शिक्षा के मंदिर की रखी थी बुनियाद
जिस शिक्षा संस्थान की नींव कभी समाजसेवी व शिक्षाविद् डॉ. मुंशीलाल शाक्य ने बड़े सपनों के साथ रखी थी, आज वही गौतम बुद्ध इंटर कॉलेज भ्रष्टाचार और व्यवसायिक स्वार्थ की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। अलीगंज क्षेत्र में स्थित यह कॉलेज अब शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि दुकानों के निर्माण स्थल में तब्दील हो चुका है।
पुराने लोगों की मानें तो डॉ. मुंशीलाल शाक्य ने कॉलेज की स्थापना समाज के पिछड़े और मध्यम वर्गीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के उद्देश्य से की थी। उन्होंने इसे शिक्षा का मंदिर कहा था, लेकिन आज उसी मंदिर की बुनियाद को मुनाफे की नींव से हिला दिया गया है।
लोगों में भी नाराजगी
अलीगंज क्षेत्र के निवासियों ने विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि यह सिर्फ एक वित्तीय अनियमितताओं का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के साथ धोखा है। उनका कहना है कि जब शिक्षा संस्थान को ही कारोबार में बदल दिया जाएगा, तो आने वाली पीढ़ियों का क्या होगा? वो शिक्षा के चमत्कारिक प्रभाव से अनजान बनी रहेगी।
प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में
इस पूरे प्रकरण पर न तो कॉलेज प्रबंधन ने कोई आधिकारिक बयान जारी किया है और न ही स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट रुख सामने आया है। इससे संदेह और गहराता जा रहा है। यह तो कहना बहुत मुश्किल है कि कॉलेज प्रशासन को प्रकरण की जानकारी न हो।
जनता की मांग: हो उच्चस्तरीय जांच
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि दोषी पाए जाएं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
यह सिर्फ एक जमीन पर कब्जे का मामला नहीं, यह शिक्षा, नीति और पारदर्शिता के खिलाफ एक बड़ा सवाल है।
