जैथरा (एटा)। डॉक्टर को यूं ही भगवान का दूसरा रूप नहीं कहा जाता। सही समय पर किया गया सही इलाज किसी की जिंदगी बचा सकता है। ऐसा ही एक मामला रविवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैथरा में देखने को मिला, जहां एक गंभीर रूप से बीमार महिला को चिकित्सकों की तत्परता से नया जीवन मिला।
गांव कसा निवासी 52 वर्षीय सरोजनी, पत्नी राम रत्न, किसी गंभीर बीमारी के चलते बोलने में भी असमर्थ हो गई थीं। वह यह भी नहीं बता पा रही थी कि उन्हें हुआ क्या है। इशारों से अपनी बात कर रही थी और जुबान बंद हो चुकी थी। परिजनों ने उन्हें नाजुक हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैथरा पहुंचाया, जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर डॉ. सुलेमान ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत इलाज शुरू किया।
मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डॉक्टर ने बिना देरी किए उपचार किया, जिससे उनकी हालत में सुधार आने लगा। परिजन भी डॉक्टर और अस्पताल कर्मियों की तत्परता को देखकर कृतज्ञ नजरों से देख रहे थे। उनके चेहरे पर यह विश्वास झलक रहा था कि अब सरोजनी जल्द ही स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी सकेंगी।
जैथरा अस्पताल प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि डॉक्टर न केवल पेशेवर होते हैं, बल्कि वे जरूरतमंद मरीजों के लिए किसी देवदूत से कम नहीं होते।