इलाहबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग की बरामदगी में देरी पर जताई कड़ी नाराज़गी।
झाँसी, सुल्तान आब्दी । उत्तर प्रदेश के झाँसी जिले में पाँच माह पूर्व अपहृत एक नाबालिग किशोरी की अब तक बरामदगी न होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झाँसी पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त की है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत ने मामले की विवेचना में हुई “भारी लापरवाही, पक्षपात और अप्रभावी जाँच” को अत्यंत गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने झाँसी के एसएसपी (SSP) को सीधे तौर पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
- इलाहबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग की बरामदगी में देरी पर जताई कड़ी नाराज़गी।
- पाँच महीने बाद भी नाबालिग लापता: पुलिस की कहानी पर कोर्ट ने जताई शंका
- कोर्ट की गंभीर टिप्पणी
- FIR से लेकर चार्जशीट तक, झाँसी पुलिस की जांच में गंभीर चूकें
- जाँच अधिकारी की भूमिका पर हाईकोर्ट गंभीर, ‘समझौते’ की आशंका
- झाँसी एसएसपी को कोर्ट के कठोर निर्देश और जवाबदेही के बिंदु
- अगली सुनवाई 10 दिसंबर को
अदालत ने एसएसपी से स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर इतने लंबे समय में नाबालिग को सुरक्षित बरामद करने के लिए “प्रभावी कदम” क्यों नहीं उठाए गए और जाँच में कहाँ चूक हुई।
पाँच महीने बाद भी नाबालिग लापता: पुलिस की कहानी पर कोर्ट ने जताई शंका
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राघवेंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और केस डायरी के अवलोकन के बाद कोर्ट ने पाया कि जाँच अधिकारी ने आरोपी के मात्र मौखिक बयान पर भरोसा कर लिया। पुलिस रिकॉर्ड में यह दर्ज किया गया कि लड़की मध्य प्रदेश के बीना स्टेशन से “भाग गई”।
कोर्ट की गंभीर टिप्पणी
* पुलिस ने इस दावे की पुष्टि के लिए कोई भी सीसीटीवी फुटेज, गवाह, कॉल रिकॉर्डिंग या अन्य निर्णायक साक्ष्य एकत्र नहीं किए।
* कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि “चार महीने बीत जाने के बाद भी नाबालिग की बरामदगी न होना झाँसी पुलिस की कार्यशैली पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न है।”
FIR से लेकर चार्जशीट तक, झाँसी पुलिस की जांच में गंभीर चूकें
मामला झाँसी के थाना सीपरी बाजार क्षेत्र का है। पीड़ित परिवार ने शुरुआत से ही पुलिस पर कोताही के आरोप लगाए थे।
जाँच अधिकारी की भूमिका पर हाईकोर्ट गंभीर, ‘समझौते’ की आशंका
अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि जाँच अधिकारी ने निष्पक्ष एवं प्रभावी जाँच करने के बजाय केवल आरोपी के पक्ष में झुकाव दिखाया है, जिसके कारण संपूर्ण जाँच प्रक्रिया “समझौता” हो गई है।
यह सख्ती झाँसी में कानून-व्यवस्था और विशेषकर अपहरण के मामलों की संवेदनशीलता को दर्शाती है।
झाँसी एसएसपी को कोर्ट के कठोर निर्देश और जवाबदेही के बिंदु
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झाँसी के एसएसपी (SSP Jhansi) से निम्नलिखित चार (4) महत्वपूर्ण बिंदुओं पर व्यक्तिगत हलफनामा माँगा है:
* किस अधिकारी ने जाँच की निगरानी की और चार्जशीट को अंतिम रूप से देखा?
* क्या पर्यवेक्षण अधिकारी (Supervising Officer) जाँच अधिकारी की रिपोर्ट से संतुष्ट था?
* नाबालिग की बरामदगी के लिए अब तक प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए?
* क्या 2024 के ‘Subhash Chandra & Ors. बनाम राज्य’ केस में उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन किया गया?
अगली सुनवाई 10 दिसंबर को
अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस मामले को 10 दिसंबर 2025 को दोपहर 2:00 बजे की डेली कॉज़ लिस्ट में सूचीबद्ध किया जाए। इसी दिन एसएसपी झाँसी का व्यक्तिगत हलफनामा कोर्ट में पेश किया जाएगा।
हाईकोर्ट की इस कठोर कार्रवाई ने झाँसी पुलिस की जाँच कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। पीड़ित परिवार की एकमात्र मांग है कि उनकी बेटी को जल्द से जल्द और सुरक्षित वापस लाया जाए।

