जैथरा,एटा। वरासत दर्ज कराने के नाम पर रिश्वत वसूली के वायरल वीडियो प्रकरण में प्रशासन ने जांच बैठा दी है, लेकिन जांच की रूपरेखा सामने आते ही निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एसडीएम अलीगंज जगमोहन गुप्ता ने पूरे मामले की जांच के लिए तहसीलदार के नेतृत्व में एक टीम गठित की है। ऐसे में यह सवाल गहराने लगा है कि जिन अधिकारियों के नाम पर लेखपाल द्वारा रिश्वत वसूले जाने का आरोप है, उन अधिकारियों के जरिए क्या इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच संभव हो पाएगी ?
मामला जैथरा ब्लाक के ग्राम सिराऊ से जुड़ा है। आरोप है कि वरासत दर्ज कराने के लिए पीड़ित से लंबे समय तक चक्कर लगवाए गए और बाद में पेटीएम के माध्यम से रिश्वत ली गई। वायरल वीडियो में लेखपाल और पीड़ित के बीच सौदेबाजी होती दिखाई दे रही है। आरोप है कि लेखपाल ने आरआई और तहसीलदार के नाम पर 10 हजार रुपये तथा अपने लिए 1500 रुपये वसूले। यह रकम कस्बा जैथरा स्थित एक जनसेवा केंद्र के संचालक के पेटीएम खाते में डलवाई गई।
वीडियो और लेनदेन के स्क्रीनशॉट सामने आने के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मचा और कार्रवाई के दबाव में जांच टीम गठित कर दी गई। लेकिन जांच की कमान तहसीलदार को सौंपे जाने से असहज स्थिति पैदा हो गई है। लोगों और जानकारों का कहना है कि जब पूरे प्रकरण में तहसील स्तर के अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं, तो उन्हीं से निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
चर्चा यह भी है कि कहीं यह मामला केवल लेखपाल तक सीमित न कर दिया जाए। यदि ऐसा हुआ, तो विभागीय मिलीभगत और जनसेवा केंद्र की संदिग्ध भूमिका पर कभी पर्दा नहीं उठ पाएगा। जनसेवा केंद्र के खाते में हुए लेनदेन और पुराने रिकॉर्ड की गहन जांच भी इस प्रकरण का अहम हिस्सा है, लेकिन यह जांच वास्तव में कितनी गंभीर होगी, इस पर संदेह बना हुआ है।
शासन की मंशानुरूप यदि प्रशासन सच में पारदर्शिता चाहता है, तो जांच किसी स्वतंत्र अधिकारी या बाहरी एजेंसी से कराई जानी चाहिए। वरना रिश्वत के इस खेल में शामिल अन्य चेहरों तक कभी आंच नहीं पहुंचेगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच सिर्फ कागजी औपचारिकता बन कर रह जाएगी या जिम्मेदारों पर वास्तविक कार्रवाई होती है?
जनसेवा केंद्र संचालक फरार
रिश्वत कांड का वीडियो वायरल होने के बाद जनसेवा केंद्र संचालक पर भी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि मामला उजागर होते ही संबंधित शिव जनसेवा केंद्र संचालक ने अपनी दुकान बंद कर दी और फरार हो गया। जन सेवा केंद्र पर गुरुवार को ताला लटका मिला है। आस पास के लोगों का कहना है कि रोजाना खुलने वाला जनसेवा केंद्र अचानक बंद होना कई सवाल खड़े करता है। सूत्रों के अनुसार, रिश्वत की रकम इसी जन सेवा केंद्र के खाते में डलवाए जाने का आरोप है, ऐसे में संचालक का फरार होना संदेह को और गहरा कर रहा है। अब देखना यह है कि जांच में जनसेवा केंद्र संचालक की भूमिका को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।
