आगरा: राष्ट्र सेविका समिति, आगरा के धार्मिक विभाग ने समाज को स्वास्थ्य और संस्कृति के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सूर्य षष्ठी पर्व के पावन अवसर पर एक विशाल निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया। इस पहल को सभी वर्गों के लोगों से भारी समर्थन मिला और बड़ी संख्या में लोगों ने स्वास्थ्य जांच का लाभ उठाया।
- स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों का विशेष योगदान
- भारतीय पर्वों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण: सूर्य षष्ठी का महत्व
- संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण पर बल
- युवाओं को धर्म का वैज्ञानिक अर्थ समझाना आवश्यक: मीनाक्षी ऋषि
- पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश: प्लास्टिक मुक्त प्रसादी
- प्रमुख भूमिका निभाने वाली बहनें
स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों का विशेष योगदान
इस स्वास्थ्य जांच शिविर को सफल बनाने में डेंटिस्ट हरवीर सिंह चौहान और डॉक्टर सत्येंद्र जी का विशेष योगदान रहा। दोनों विशेषज्ञों ने शिविर में आए सभी लोगों की स्वास्थ्य जांच की और उनके प्रश्नों एवं शंकाओं का समाधान करते हुए उन्हें पूरी तरह से संतुष्ट किया।
भारतीय पर्वों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण: सूर्य षष्ठी का महत्व
शिविर के दौरान, राष्ट्र सेविका समिति की सभी बहनों ने एकत्रित होकर यह चिंतन किया कि देश का हर पर्व किसी न किसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ है।
समिति की सदस्यों ने बताया कि सूर्य षष्ठी पर्व (छठ पूजा) का आयोजन सदियों से होता चला आ रहा है क्योंकि इस दिन, विशेष तौर पर, सूर्य सर्दियों के आगमन से ठीक पहले सबसे अधिक ऊर्जावान और गर्म होता है। इस समय सूर्य की उपासना और उसके वैज्ञानिक महत्व को समझना अत्यंत आवश्यक है।
संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण पर बल
राष्ट्र सेविका समिति का मूल प्रयास भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों का संरक्षण करते हुए आने वाली पीढ़ी को राष्ट्र धर्म की ओर अग्रसर करना है।
प्रांत संपर्क प्रमुख माननीय मीणा बंसल जी ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए इस उद्देश्य को और भी स्पष्ट किया। विभाग कार्यवाहिका श्रीमती श्रुति सिंघल जी ने कहा कि समिति का धार्मिक विभाग अपने कार्य की ओर सही दिशा में अग्रसर है, जो समाज में धर्म और राष्ट्रबोध को जागृत कर रहा है।
युवाओं को धर्म का वैज्ञानिक अर्थ समझाना आवश्यक: मीनाक्षी ऋषि
राष्ट्र सेविका समिति धार्मिक एवं संपर्क प्रमुख मीनाक्षी ऋषि ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि, “आज का युवा तर्कशील है। यदि उसे धर्म का सही अर्थ और उसके पीछे छिपा वैज्ञानिक दृष्टिकोण नहीं समझाया गया, तो वह भटक सकता है। इसलिए, यह हमारा कर्तव्य बनता है कि हम हर पर्व और हर परंपरा का सही अर्थ युवाओं तक पहुंचाएं। इसके लिए हमें ऐसे विशेष आयोजन करते रहने होंगे।”
कार्यक्रम में सह सेवा प्रमुख प्रांत वंदना जी और सह शारीरिक प्रमुख रति जी की भी गरिमामय उपस्थिति रही।
पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश: प्लास्टिक मुक्त प्रसादी
इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज को एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश भी दिया गया: पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भोजन प्रसादी और अन्य इस्तेमाल में आने वाले प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग कम से कम किया जाए।
इस सिद्धांत का पालन करते हुए, कार्यक्रम में वितरित की गई भोजन प्रसादी के समय किसी भी तरह के प्लास्टिक का प्रयोग नहीं किया गया और कार्यक्रम स्थल तथा उसके आसपास के स्थान को एकदम स्वच्छ रखा गया।
प्रमुख भूमिका निभाने वाली बहनें
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में धार्मिक विभाग की बहनों ने विशेष तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनमें वंदना सिंह जी, रश्मि चतुर्वेदी, लकी शिवहरे, प्रमुग्धा सोलंकी, प्रियंका गौतम, प्रेमलता शर्मा, ममता शर्मा, दीपमाला, वंदना, सोनल, प्रज्ञा सिंह और अंजलि चतुर्वेदी प्रमुख रूप से शामिल रहीं।
