अग्र भारत संवाददाता
आगरा। जिले में पुलिस विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं। अछनेरा और इरादतनगर थाना क्षेत्रों में तैनात पुलिस के उप निरीक्षक और अछनेरा के वरिष्ठ उप निरीक्षक को रिश्वत लेने के आरोप में वीडियो वायरल होने के बाद विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए दोनों को निलंबित कर दिया है।
हालांकि, दोनों मामलों में अब तक भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज न होने पर सवाल उठ रहे हैं।
अछनेरा थाने में तैनात वरिष्ठ उप निरीक्षक जितेंद्र यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह थाना परिसर में कुर्सी पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में एक व्यक्ति डायरी के अंदर कथित रूप से पैसे रखकर उन्हें देता नजर आ रहा है। आरोप है कि यह रिश्वत की रकम थी। हालांकि वीडियो में रकम और देने वाले व्यक्ति का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीसीपी पश्चिम आदित्य सिंह ने जांच के आदेश दिए। एसीपी की रिपोर्ट के आधार पर देर रात एसएसआई को निलंबित कर दिया गया।वहीं, इरादतनगर थाने में तैनात दरोगा मानवेंद्र गंगवार पर एक पूर्व फौजी से धोखाधड़ी के मुकदमे में नाम हटाने के एवज में 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है। पीड़ित पूर्व सैनिक ने बातचीत का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में दरोगा कथित रूप से वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए भी सुना जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने मामले की जांच अपर पुलिस आयुक्त को सौंपते हुए दरोगा को निलंबित कर दिया है।पीड़ित के अनुसार, वह कारगिल युद्ध के ऑपरेशन विजय में शामिल रह चुका है और उसके खिलाफ दर्ज मुकदमे में नाम हटाने के लिए भारी रकम मांगी गई थी। उसने पुलिस आयुक्त और विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई है।दोनों मामलों में एक समान बात यह सामने आई है कि कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित रही है। अब तक किसी भी आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इससे पुलिस कार्यप्रणाली और विजिलेंस की निष्क्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्सर ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई तभी होती है, जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाता है, अन्यथा शिकायतें दबा दी जाती हैं।फिलहाल दोनों प्रकरणों की जांच जारी है और विभागीय कार्रवाई के आगे बढ़ने का इंतजार किया जा रहा है।
