प्रदीप यादव
एटा (जैथरा) । जैथरा में जन सेवा केंद्रों पर बनाए जा रहे जन्म प्रमाण पत्रों का प्रकरण अब तूल पकड़ता जा रहा है। नगर में हर तरफ केंद्र संचालकों के फर्जीवाडे की चर्चाएं चल रही हैं। केंद्र संचालकों के फर्जीवाड़े की खबर अग्र भारत समाचार पत्र में प्रकाशित होने के बाद जनपद का खुफिया विभाग हरकत में आ गया। कई केंद्र संचालक अपनी दुकान बंद कर भाग निकले तो कुछ अपनी दुकान स्थानांतरण कर बचने की जुगत में है।
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सूत्र बताते हैं कि हजारों की संख्या में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं । जिनका उपयोग आधार कार्ड आदि बनवाने में किया जा रहा था।एक जन्म प्रमाण पत्र बनाने के 100 से 1500 रुपए तक वसूल लिए जाते थे। यह पूरा सिंडिकेट कोड वर्ड के माध्यम से संचालित हो रहा था। सिंडिकेट से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। अब जनपद का खुफिया विभाग मामले की तह में जाकर जांच में जुट गया है।
नगर के स्थानीय जानकारों का मानना है। कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होना राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती देता है। प्रकरण की किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए।
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बता दे रायबरेली में बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का गोरख धंधा चल रहा था। एनआईए की जांच के बाद मामले का पर्दाफाश हुआ और संबंधित आरोपियों को जेल भेजा गया था।
एसडीएम अलीगंज प्रतीत त्रिपाठी ने बताया कि फर्जीवाड़ा करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। निकाय, ब्लाक एवं राजस्व की संयुक्त टीमें गहराई से जांच कर रही हैं। डाकघर एवं बीआरसी से भी डाटा निकलवाकर जांच कराई जाएगी। दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही होगी।
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जन्म प्रमाण पत्र जारी करने के नियम
जन्म के 21 दिन तक निशुल्क जन्म प्रमाण पत्र बनता है । 21 से 30 दिन में बनवाने पर 2 रुपए प्रतिदिन का जुर्माना भरना पड़ता है। एक माह से एक वर्ष तक डीपीआरओ के अनुमोदन के बाद और एक वर्ष के बाद एसडीएम से अनुमोदन के बाद जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है।