झांसी (उत्तर प्रदेश): वीरांगना नगरी झांसी में आज एक अजीबोगरीब और बेहद अफसोसजनक स्थिति देखने को मिली। महारानी लक्ष्मीबाई की लगभग 8 लाख रुपये की भव्य सिंहासनारूढ़ प्रतिमा को लक्ष्मीबाई पार्क में स्थापित किया जाना था, लेकिन पार्क का दरवाजा न खुलने के कारण प्रतिमा दिनभर गेट के बाहर ही खड़ी रही। शासन-प्रशासन की कथित अनुमति के बावजूद नगर निगम और संस्था के बीच मचे घमासान ने इस गौरवपूर्ण कार्य को हंगामे की भेंट चढ़ा दिया।
क्या है पूरा विवाद?
स्वयंसेवी संगठन ‘कर्मयोगी संस्था’ रानी लक्ष्मीबाई की एक भव्य सिंहासनारूढ़ प्रतिमा लेकर लक्ष्मीबाई पार्क पहुंची थी। संस्था के अध्यक्ष संतोष गौड़ का दावा है कि उनके पास शासन से लेकर जिला प्रशासन तक की सभी आवश्यक अनुमतियां मौजूद हैं। इसी अनुमति के तहत प्रतिमा को पार्क के भीतर स्थापित किया जाना तय था।
हैरानी की बात तब हुई जब शनिवार को प्रतिमा पार्क के मुख्य द्वार पर पहुंची, लेकिन प्रशासन ने गेट का ताला ही नहीं खोला।
पार्क के बाहर भारी हंगामा
पार्क का गेट न खुलने से संस्था के सदस्यों और स्थानीय नागरिकों में भारी रोष फैल गया। मौके पर जमकर नारेबाजी और हंगामा हुआ। सूचना मिलते ही नगर निगम के अधिकारी और भारी पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया। दिनभर अधिकारियों के आने-जाने और मान-मनौव्वल का दौर चलता रहा, लेकिन शाम 5 बजे तक भी कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
प्रशासनिक पेंच में फंसी प्रतिमा
शाम तक पार्क के गेट पर ताला लटकता रहा और वीरांगना की प्रतिमा अपनी ही नगरी में, उन्हीं के नाम पर बने पार्क के बाहर ‘इंतजार’ करती रही। नगर निगम और जिला प्रशासन के बीच आपसी समन्वय की कमी का खमियाजा एक स्वयंसेवी संस्था और जनता की भावनाओं को भुगतना पड़ा।
संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि जब सारी औपचारिकताएं पूरी थीं, तो ऐन वक्त पर गेट क्यों नहीं खोला गया? फिलहाल खबर लिखे जाने तक प्रतिमा पार्क के बाहर ही खड़ी थी और प्रशासनिक गतिरोध बरकरार था।
