झांसी। भारतीय जनता पार्टी की महानगर कार्यसमिति की हालिया जारी सूची विवादों के घेरे में आ गई है। खबर है कि चिरगांव क्षेत्र के एक ऐसे व्यक्ति को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, जिसका नाम पुलिस रिकॉर्ड में एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर (HS) के तौर पर दर्ज है। इस खुलासे के बाद से पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं और पुराने भाजपाइयों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
थाने की ‘टॉप’ लिस्ट में नाम, संगठन में ‘टॉप’ पद!
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मार्च माह में भाजपा द्वारा घोषित की गई कार्यसमिति की सूची में चिरगांव के एक व्यक्ति का नाम शामिल है। चौंकाने वाली बात यह है कि उक्त व्यक्ति चिरगांव थाने का हिस्ट्रीशीटर संख्या 5-A है और वह थाने की टॉप अपराधियों की सूची में शुमार है। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को ‘अनुशासित’ पार्टी में पद मिलना अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
पार्टी के भीतर ही बगावत के सुर: “मुंह बनाए बैठे हैं पुराने कार्यकर्ता”
इस सूची के सार्वजनिक होने के बाद से ही कई पुराने और कर्मठ भाजपा कार्यकर्ता इस चयन से बेहद नाराज हैं। सूत्रों का कहना है कि कार्यकर्ता मन ही मन आपत्ति तो जता रहे हैं, लेकिन अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर से खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। कार्यकर्ताओं का सीधा सवाल है कि क्या संगठन ने नाम फाइनल करने से पहले व्यक्ति की पृष्ठभूमि (Character Verification) की जांच करना जरूरी नहीं समझा?
साख पर सवाल: किसकी सिफारिश पर हुई ‘दागी’ की एंट्री?
एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश को ‘अपराध मुक्त’ बनाने के लिए अपराधियों पर शिकंजा कस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ झांसी भाजपा में हिस्ट्रीशीटर की एंट्री पार्टी की साख पर बट्टा लगा रही है।
क्या शीर्ष नेतृत्व को इस पदाधिकारी के आपराधिक इतिहास के बारे में अंधेरे में रखा गया?
आखिर किस रसूखदार नेता की सिफारिश पर पुलिस रिकॉर्ड के ‘दागी’ चेहरे को संगठन की कमान सौंपी गई?

