झांसी: वित्तीय वर्ष 2025-26 की छात्रवृत्ति योजना को लेकर राजकीय पैरामेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में एक मंडल स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में झांसी, जालौन और ललितपुर जिलों के 300 से अधिक शिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्यों और नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रवृत्ति पोर्टल में किए गए नए संशोधनों और समय सारिणी के बारे में जानकारी देना था।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि मंडलायुक्त श्री बिमल कुमार दुबे ने छात्रवृत्ति योजना को एक बहुत ही संवेदनशील योजना बताया। उन्होंने सभी शिक्षण संस्थानों से आग्रह किया कि वे इस कार्यशाला में दी गई जानकारी को गंभीरता से लें, ताकि कोई भी योग्य छात्र इस योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।
छात्रवृत्ति के नए नियम और प्रक्रिया
कार्यशाला में समाज कल्याण निदेशालय, लखनऊ से आए सहायक निदेशक श्री सिद्धार्थ मिश्रा ने योजना से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी दी:
- पात्रता शर्तें: उन्होंने आय सीमा, आयु सीमा और अन्य पात्रता मानदंडों के बारे में बताया।
- मास्टर डेटा और आवेदन: दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के लिए हर साल मास्टर डेटा फीड किया जाता है। इसके लिए आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी गई, साथ ही यह भी बताया गया कि छात्रों को आवेदन के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होगी।
- फीस और दरों का निर्धारण: समूह के अनुसार शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति की दरों की जानकारी भी दी गई।
- समय सारिणी: अनुसूचित जाति/जनजाति, सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए आवेदन की समय सारिणी के बारे में बताया गया।
OTR और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन होगा अनिवार्य
कार्यशाला में कई महत्वपूर्ण बदलावों पर जोर दिया गया:
- OTR (One Time Registration): वित्तीय वर्ष 2025-26 से स्टेट पोर्टल पर ओ.टी.आर. की व्यवस्था शुरू की जा रही है। छात्रों को पहले एन.एस.पी. पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा, जिसके बाद उनका व्यक्तिगत विवरण स्टेट पोर्टल पर अपने आप अपडेट हो जाएगा।
- आधार डेटा: छात्रों का व्यक्तिगत विवरण सीधे उनके आधार कार्ड से लिया जाएगा। अगर आधार में कोई जानकारी गलत है, तो उसे ठीक कराने के लिए छात्रों को तुरंत सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- बायोमेट्रिक सत्यापन: 2025-26 से सभी संस्थानों के नोडल अधिकारियों (INO), प्रमुख (HOI) और छात्रों का बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन अनिवार्य होगा।
- जियो-टैगिंग: पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सभी शिक्षण संस्थानों की जियो-टैगिंग की जाएगी।
AISHE और मास्टर डेटा की भूमिका
ए.आई.एस.एच.ई. (AISHE) वैलिडेशन को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया गया। मास्टर डेटा को संस्थान, विश्वविद्यालय और जिला समिति द्वारा सत्यापित करने के बाद ही आवेदन पत्र आगे बढ़ाया जाएगा। मास्टर डेटा में संस्थान द्वारा लॉक की गई सीटों की संख्या के आधार पर ही आवेदन स्वीकृत होंगे।
जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रीमती ललिता यादव ने कार्यशाला में आए सभी प्रधानाचार्यों और नोडल अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए इसे सफल बताया। यह कार्यशाला छात्रों को मिलने वाली वित्तीय सहायता को समय पर और सही ढंग से सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


