मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रो0 एस0 पी0 सिंह बघेल, केन्द्रीय मंत्री, मत्स्य, पशुपालन, डेयरी और पंचायतीराज मंत्रालय उपस्थित रहे। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में अरुणाचल प्रदेश के कृषि, पशु चिकित्सा, बागवानी एवं मत्स्य पालन मंत्री श्री गेब्रियल डी. वांगसु ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। इस कार्यक्रम में कई अन्य गणमान्य अतिथि और क्षेत्रीय अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें डॉ0 राघवेन्द्र भट्टा, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली और डॉ0 अभिजीत मित्रा, आयुक्त, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली प्रमुख थे।
सम्मान और पुरस्कार वितरण

कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील बकरी पालकों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया और कुल चार प्रतियोगिताओं में विजेताओं को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार से नवाजा गया। इसके साथ ही, इस महाकुंभ में 3000 से अधिक बकरी पालक किसान और कृषि वैज्ञानिक उपस्थित थे, जिन्होंने बकरी पालन और इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों पर गहन चर्चा की।
बकरी पालन और दूध उत्पादन पर जोर
कार्यक्रम में डॉ0 ए. के गौर, ए.डी.जी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने बकरी पालन और उसके दूध उत्पादन की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने बकरी के दूध की मेडिसिनल प्रॉपर्टीज (औषधीय गुण) पर भी चर्चा की। वहीं, डॉ0 राघवेन्द्र भट्टा ने बकरी के दूध के उपयोग और उसकी स्वास्थ्य लाभ पर विस्तार से जानकारी दी और किसानों को बकरी पालन के लाभ के बारे में बताया।
कृषि और पशुपालन के उभरते अवसर
श्री गेब्रियल डी. वांगसु ने बकरी पालन के उभरते भविष्य पर अपने विचार साझा किए और किसानों से अपील की कि वे संस्थान में चल रही परियोजनाओं का लाभ उठाएं। वहीं, प्रो0 एस0 पी0 सिंह बघेल ने बकरी पालन को “ए.टी.एम.” (Any Time Money, Any Time Milk, Any Time Meat) के रूप में परिभाषित किया और इसके महत्व को उजागर किया।
नई तकनीकियों और शोध पर चर्चा
इस कार्यक्रम में बकरी पालन के वैज्ञानिक तरीके, उच्च नस्ल की बकरियों का प्रदर्शन, पशुपालन तकनीकों पर चर्चा, और बकरी प्रबंधन के नए तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य

इस महाकुंभ का मुख्य उद्देश्य बकरी पालक किसानों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नई तकनीकों और प्रबंधन उपायों के बारे में जानकारी देना था ताकि वे अधिक आत्मनिर्भर बन सकें और उनकी आय में वृद्धि हो सके। साथ ही, महिला किसानों और एससी/एसटी किसानों के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया।
राष्ट्रीय बकरी मेला एवं कृषि-औद्योगिक प्रदर्शनी 2024 ने बकरी पालन से जुड़े किसानों को न केवल नई तकनीकों और प्रबंधन की जानकारी दी, बल्कि उनके आर्थिक विकास और समृद्धि के लिए कई नए रास्ते खोले। यह कार्यक्रम बकरी पालन के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।