झाँसी, उत्तर प्रदेश: संगठित अपराध पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे “ऑपरेशन लंगड़ा” के तहत झाँसी पुलिस ने इस साल कई इनामी बदमाशों को मुठभेड़ में घायल कर अपराधियों के बीच बड़ा खौफ पैदा किया है। जनपद में लगभग 50 से अधिक अपराधियों के पैर में गोली मारकर उन्हें ‘अपाहिज’ बनाए जाने के बाद पुलिस को ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ की संज्ञा दी जाने लगी है। लेकिन इसी बीच, थाना सीपरी बाजार क्षेत्र में हुए एक चर्चित हत्याकांड का मुख्य आरोपी रिंकू यादव पुलिस की पकड़ में आए बिना न्यायालय में आत्मसमर्पण कर देता है। यह घटना जनपद पुलिस की मुस्तैदी पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
‘ऑपरेशन लंगड़ा’ से अपराधियों में दहशत का माहौल
झाँसी पुलिस का संगठित आपराधिक गिरोहों के खिलाफ आक्रामक रुख साफ दिखाई दे रहा है। सटीक इंटेलिजेंस के आधार पर की जा रही ताबड़तोड़ कार्रवाईयों और जवाबी फायरिंग में अपराधियों के पैरों में गोली लगने की घटनाओं ने बदमाशों को भूमिगत होने पर मजबूर कर दिया है। पिछले कुछ महीनों में हुई 50 से अधिक मुठभेड़ों ने अपराधियों को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पुलिस पर फायरिंग करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
आम जनता जहाँ ऐसे एनकाउंटर से खुश है और इसे कानून-व्यवस्था की बहाली के तौर पर देख रही है, वहीं अपराधियों के बीच ऑपरेशन लंगड़ा का खौफ चरम पर है।
मुख्य आरोपी रिंकू यादव की फरारी और आत्मसमर्पण
झाँसी पुलिस जहाँ एक तरफ एनकाउंटर में बदमाशों के पैर तोड़ रही है, वहीं दूसरी तरफ, थाना सीपरी बाजार क्षेत्र के एक चर्चित हत्या मामले का मुख्य आरोपी रिंकू यादव लम्बे समय तक पुलिस की पकड़ से दूर रहा। पुलिस ने इस हत्याकांड में कई सह-आरोपियों को गिरफ्तार किया, यहाँ तक कि कुछ से मुठभेड़ भी हुई, लेकिन मास्टरमाइंड रिंकू यादव पुलिस के हाथ नहीं लग पाया।
अंततः, रिंकू यादव ने योगी सरकार की हाई-टेक पुलिस और ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ के खौफ को चकमा देते हुए न्यायालय में चुपचाप आत्मसमर्पण कर दिया।
सवाल: पुलिस की कार्रवाई पर बड़ी चूक कहाँ?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस जनपद पुलिस को ऑपरेशन लंगड़ा के चलते एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहा जा रहा है, वह मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने में क्यों नाकाम रही?
इंटेलिजेंस फेल्योर: क्या रिंकू यादव की लोकेशन को लेकर पुलिस के पास सटीक इनपुट नहीं था, जबकि अन्य बदमाशों के बारे में पुलिस को सटीक इंटेलिजेंस मिल रही है?
आत्मसमर्पण की रणनीति: क्या रिंकू यादव ने पुलिस की एनकाउंटर की रणनीति से बचने के लिए जानबूझकर लम्बी फरारी काटी और आत्मसमर्पण का सुरक्षित रास्ता चुना?
सीपरी बाजार पुलिस पर सवाल: थाना सीपरी बाजार क्षेत्र से संबंधित इस मामले में मुख्य आरोपी का पकड़ से दूर रहना, स्थानीय पुलिस की कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े करता है।
ऑपरेशन लंगड़ा का उद्देश्य अपराधियों को खत्म करना नहीं, बल्कि उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत लाना है। ऐसे में, मुख्य आरोपी का पुलिस को चकमा देकर न्यायालय में आत्मसमर्पण करना दर्शाता है कि अपराधियों को अभी भी कानून की शरण में जाने का मौका मिल रहा है, जबकि पुलिस की कोशिश उन्हें मुठभेड़ के जरिए गिरफ्तार करने की रही थी।
अब देखना यह होगा कि इस आत्मसमर्पण के बाद पुलिस इस चूक का विश्लेषण कैसे करती है और भविष्य में मुख्य आरोपियों को फरारी के दौरान ही गिरफ्तार करने की अपनी रणनीति को कितना मजबूत करती है।
