हाईकोर्ट-डीएम के आदेश की उडाई जा रही हैं धज्जियां
रोक के बाद भी गौतम बुद्व स्कूल की दुकानो की हो रही है खरीद फरोख्त
18 मार्च को उच्चाधिकारियों ने किया था विद्यालय का निरीक्षण
19 मार्च को एक दुकान की हुई रजिस्ट्री
एटा,अलीगंज- गौतम बुद्व प्रबंध समिति न तो उच्च न्यायालय का आदेश मानती है और न ही जिलाधिकारी का आदेश कोई उनके लिए मायने रखता है। हाईकोर्ट के आदेश पर 18 मार्च को अधिकारियों ने जांच की, वहीं 19 मार्च को प्रबंध समिति द्वारा एक दुकान की रजिस्ट्री कर दी। मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा प्रबंधक पर पूर्व में एक प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी है।
विदित हो कि जिलाधिकारी द्वारा गौतम बुद्व इंटर कॉलेज में 33 दुकानों को बनाने की अनुमति प्रदान की गई थी, लेकिन मानक के अनुसार कार्य न होने पर अनुमति को निरस्त कर दिया गया था।
गौतम बुद्व इण्टर कॉलेज अलीगंज में अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में आय की योजना सृजित किए जाने हेतु 14 मई 2024 को जिलाधिकारी की अनुमति पर स्थायी दुकानों का निर्माण हुआ था। दुकानों को बनाने के सात बिन्दु दर्शाते हुए मानक और नियमों का उल्लेख किया गया था। जिसमें प्रबंध समिति इन दुकानों के निर्माण से किसी भी दशा में विद्यालय के शैक्षिक वातावरण एवं आवागमन सम्बन्धी गतिविधियों पर कोई विपरीत प्रभाव न पडे। स्थायी निर्माण से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से मानचित्र स्वीकृत कराकर निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाए। दुकानों से प्राप्त आय को संस्था के प्रबंधक व प्रधानाचार्य के संयुक्त खाते में जमा किया जाए तथा जमा धनराशि का उपयोग संस्था हित में किया जाए। दुकानों का निर्माण आदि कार्यों को पारदर्शी, संगत नियमों के अनुकूल हो। निर्माणाधीन दुकानों से प्राप्त आय को केवल विद्यालय के विकास एवं उत्थान में उपयोग किया जाए तथा विकास एवं उत्थान के लिए जो भी प्रस्ताव होंगे वे विद्यालय के प्रधानाचार्य के माध्यम से प्रबंध समिति के अनुमोदन के उपरान्त ही स्वीकार तथा अस्वीकार हों। आय एवं उसके व्यय का ऑडिट पंजीकृत सीए से कराकर वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट कार्यालय जिला विद्यालय निरीक्षक एटा में वित्तीय वर्ष के अंत में प्रस्तुत किया जाए। अगर उक्त प्रतिबंधों का पालन नहीं होता है तो प्रबंध समिति के विरूद्व सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत कार्यवाही की जाएगी।
गौतम बुद्व इण्टर कॉलेज प्रबंध समिति द्वारा उक्त निर्दिष्ट आदेशों को दरकिनार कर किरायेदार दुकानों से मोटी रकम ऐंठी तथा मानकविहीन दुकानों को बनवाया एवं एक दर्जन से अधिक कमरों को गलत तरीके से तोडा गया। जब मामला मीडिया में आया तो जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह ने मामले की जांच हेतु टीम गठित की। इसके बाद जिलाधिकारी ने अनुमति को निरस्त कर दिया था। अनुमति निरस्तीकरण के विरोध में प्रबंध समिति द्वारा हाईकोर्ट में शरण ली गई थी। हाईकोर्ट द्वारा पुनः जांच कराकर 18 मार्च तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश जिलाधिकारी को दिए थे। 18 मार्च को जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक, एसडीएम तथा अन्य उच्चाधिकारियों ने जांच की तथा प्रबंधक से स्पष्टीकरण मांगा तथा निर्देश दिए गए थे कि दुकानों का न तो निर्माण किया जाए और न ही दुकानों के किराये के लिए रजिस्ट्री हो, लेकिन जैसे ही 18 मार्च को अधिकारी जांच करके गए उसी के दूसरे दिन यानी 19 मार्च को प्रबधंक रामगोपाल शाक्य ने लेख संख्या 2081 पृष्ठ संख्या 367 से 382 एवं खण्ड सं0 7334 में अलीगंज उपनिबंधन कार्यालय अलीगंज में एक दुकान की 30 साल से अधिक समय के लिए रजिस्ट्री कर दी। अब देखना दलचस्प होगा कि प्रशासन अब क्या कदम उठाता है।
