सुल्तान आब्दी
झांसी। गरौठा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक दीपनारायण यादव बीते कई महीनों से कानूनी मामलों के चलते जेल के अंदर और बाहर का रास्ता देख रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता और संगठन उनसे दूरी बनाते नज़र आए। न तो खुलकर समर्थन किया गया और न ही किसी स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ पार्टी की ओर से कोई ठोस बयान सामने आया।
जब पूर्व विधायक के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया, उस समय सपा जिलाध्यक्ष सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी चर्चा का विषय बनी रही। पार्टी की गतिविधियां केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहीं, जबकि ज़मीनी स्तर पर कोई आंदोलन या सार्वजनिक विरोध देखने को नहीं मिला।
हालांकि अब अचानक सपा जिलाध्यक्ष का जेल जाकर पूर्व विधायक दीपनारायण यादव से मुलाकात करना राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच यह चर्चा तेज़ हो गई है कि आखिर ऐसा क्या बदला, जिससे सपा जिलाध्यक्ष को अब पूर्व विधायक की सुध आई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात या तो पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर हुई है या फिर आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए संगठन पर बना दबाव इसका कारण हो सकता है। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या समाजवादी पार्टी आने वाले समय में दीपनारायण यादव के साथ मजबूती से खड़ी दिखाई देगी या यह समर्थन केवल औपचारिकता तक ही सीमित रहेगा। क्या पार्टी प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ खुलकर सड़क पर उतरेगी या फिर सोशल मीडिया के माध्यम से ही विरोध दर्ज कराकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मानेगी?
फिलहाल सपा जिलाध्यक्ष की यह पहल चर्चा में है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी वास्तव में कितने समय तक पूर्व विधायक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती है या यह सहानुभूति कुछ दिनों में ही ठंडी पड़ जाएगी। लेकिन सवाल यह उठता है झांसी में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता छोटी छोटी बातों पर निकल कर पुतला दहन करते है ज्ञापन देते हैं लेकिन एक पूर्व विधायक के लिए किसी का खुलकर न बोलना। यह अपने आप में यह साबित करता है कि सपा के लोग केवल सत्ता में रहते हुए ही अपने आप को नेता सिद्ध करते हैं। आखिर यह नेता उस समय कहां गायब हो जाते हैं जब पार्टी के कार्यकर्ता किसी वरिष्ठ नेता के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है।देखने वाली बात यह है कि जो जनपद में खाटी के और वरिष्ठ नेता अपने आप को कहलाने में नहीं चूकते हैं। वहीं पूर्व विधायक के मामले में ऐसे नेताओं का मौन धारण कर लेना
यह कहीं ना कहीं ऐसे नेताओं की कार्यशैली पर बड़ा सवाल यह निशान लगाता है मासूदे हम लोग
