किरावली में युवक की टांगें तोड़ीं, जीवनी मंडी में प्लास से नाखून खींचकर दी थर्ड डिग्री, मलपुरा में अवैध हिरासत—मुकदमे अब भी सवाल
आगरा। जनपद में पुलिस द्वारा की जा रही बर्बर कार्रवाई अब अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि एक खतरनाक सिलसिले का रूप ले चुकी हैं। किरावली, जीवनी मंडी और मलपुरा थाना क्षेत्र में सामने आए मामलों ने यह साफ कर दिया है कि निलंबन और लाइन हाजिरी जैसी विभागीय कार्रवाइयां पुलिसिया अत्याचार पर लगाम लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं। पीड़ित परिवार आज भी मुकदमे की मांग कर रहे हैं, जबकि पुलिस महकमे में बर्बरता का मनोबल लगातार बढ़ता जा रहा है।
किरावली प्रकरण: युवक की दोनों टांगें तोड़ीं, लेकिन मुकदमा आज तक नहीं :किरावली थाना क्षेत्र में पुलिस की बर्बर पिटाई से एक युवक की पिटाई कर थर्ड डिग्री देकर दोनों टांगें तोड़ दिए जाने का मामला सामने आया था। भारी जनआक्रोश के बाद थाना प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित तो कर दिया गया, लेकिन पीड़ित परिवार की बार-बार मांग के बावजूद आज तक कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।यह कार्रवाई इस बात का संकेत मानी जा रही है कि पुलिस अपने ही कर्मियों को कानून के शिकंजे से बचाने का प्रयास कर रही है, जिससे अन्य थानों में भी अत्याचार करने वालों का हौसला बढ़ा है।
जीवनी मंडी: थर्ड डिग्री की इंतहा, नाखून तक उखाड़े :किरावली प्रकरण के बाद भी पुलिस नहीं संभली। जीवनी मंडी चौकी प्रभारी रविंद्र कुमार ने सैंया के बाग किशोरा वीरई निवासी नरेंद्र कुशवाह को चौकी और फिर छत्ता थाने ले जाकर थर्ड डिग्री दी। पीड़ित को इतना पीटा गया कि डंडे टूट गए, पैरों में सूजन आ गई और प्लास से नाखून उखाड़ लिए गए।
नरेंद्र का ‘अपराध’ सिर्फ इतना था कि उसने टेंपो चलाकर पुलिसकर्मियों को छोड़ने से मना कर दिया। वह न तो अपराधी है और न ही उसके खिलाफ कोई हिस्ट्रीशीट है।मामला उजागर होने पर चौकी प्रभारी को निलंबित किया गया और छत्ता थाना प्रभारी प्रमोद कुमार को शिथिल पर्यवेक्षण के आरोप में लाइन हाजिर कर दिया गया, लेकिन यहां भी मुकदमे को लेकर पुलिस का रवैया सवालों के घेरे में है।पीड़ित परिजन दोषी पुलिस कर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
मलपुरा: अवैध हिरासत में पूरा परिवार :इसी बीच मलपुरा थाना क्षेत्र के गांव अजीजपुर में सेवानिवृत्त दारोगा श्रीराम आर्य और उनके परिवार को अवैध रूप से हिरासत में लेने का मामला सामने आया। इस प्रकरण में मलपुरा थाना प्रभारी विनोद कुमार मिश्र को लाइन हाजिर किया गया।उनके स्थान पर खंदौली इंस्पेक्टर राजेंद्र प्रसाद वशिष्ठ को मलपुरा थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
सिर्फ निलंबन से नहीं रुकेगी बर्बरता :लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब गंभीर आरोपों में भी पुलिसकर्मियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता, तो क्या निलंबन और लाइन हाजिरी महज औपचारिकता बनकर नहीं रह गई है?आमजन का कहना है कि जब तक थर्ड डिग्री और अवैध हिरासत जैसे मामलों में बीएनएस की धाराओं में मुकदमे दर्ज कर जेल नहीं भेजा जाएगा, तब तक पुलिस महकमे में कानून का नहीं, बल्कि लाठी का राज चलता रहेगा।
