आगरा, उत्तर प्रदेश – रहनकलां गांव में एत्मादपुर विकासखंड में बन रहे पांच रेडियल वैल (रेनीवेल) प्रोजेक्ट के बारे में सिंचाई बंधु अध्यक्ष एवं जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ मंजू भदौरिया ने सिंचाई विभाग से विस्तार से जानकारी मांगी है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि यमुना नदी के तटीय गांव के लिए इस प्रोजेक्ट से पानी के अत्यधिक दोहन का क्या असर होगा? क्या इससे नदी की जलधारा के अविरल प्रवाह पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा?
यह सवाल तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब एत्मादपुर क्षेत्र के ग्रामीण और नागरिक संगठन लगातार डॉ मंजू भदौरिया से इस प्रोजेक्ट पर अपनी चिंताएँ साझा कर रहे हैं। कई ग्रामीणों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के कारण यमुना नदी के जल प्रवाह और स्थानीय जल स्रोतों जैसे कुएं, हैंडपंप और सबमर्सिबल पंपों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
रेनीवेल प्रोजेक्ट और उसकी जल दोहन क्षमता
जल निगम द्वारा इस प्रोजेक्ट के तहत, ताजमहल पार्श्व नगला पैमा में पहले से बन रहे ‘ताज बैराज’ के डाउन में रहनकलां गांव में भारी डिस्चार्ज क्षमता वाले पांच रेनीवेल बनाए जा रहे हैं। इन रेडियल वैल्स में से एक स्टैंडबाई के रूप में कार्य करेगा, जबकि बाकी चार पानी का अनवरत जल दोहन करेंगे। रुड़की विश्वविद्यालय द्वारा इस प्रोजेक्ट की स्टडी की जा रही है, और प्रोजेक्ट की क्षमता प्रतिदिन 2 करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति करने की होगी।
प्रत्येक रेनीवेल की गहराई लगभग 30 मीटर होगी, और नदी के एक्यूफर (water aquifer) और सीपेज से पानी इन कुओं में पहुंचेगा, जिसे पंप के माध्यम से प्रस्तावित क्षेत्र में सप्लाई किया जाएगा। हालांकि, इस विशाल जल दोहन से यमुना नदी की धारा और आसपास के क्षेत्रों में जलवायु स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक इम्पैक्ट रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
यमुना नदी पर जल प्रवाह की स्थिति
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ मंजू भदौरिया ने इस प्रोजेक्ट के प्रभाव की चिंता जताते हुए कहा कि यमुना नदी का प्रवाह आगरा क्षेत्र में काफी धीमा हो चुका है, लेकिन जल शून्यता की स्थिति नहीं बनी है। यह महत्वपूर्ण है कि नदी के प्रवाह को सुनिश्चित किया जाए ताकि स्थानीय जलवायु और सिंचाई प्रणालियों पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।
सिविल सोसायटी आगरा के प्रतिनिधिमंडल ने भी इस मुद्दे पर डॉ भदौरिया से मुलाकात कर यमुना नदी के अविरल प्रवाह की स्थिति बनाए रखने का आग्रह किया था। यह नदी न केवल आगरा के तटीय गांवों के लिए जल आपूर्ति का स्रोत है, बल्कि इसके साथ-साथ यह जलवायु और भूगर्भ जल रिचार्ज सिस्टम में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।
अन्य नदियों की स्थिति
आगरा जिले की प्रमुख नदियाँ जैसे चम्बल, उटंगन, खारी और किबाड में जल प्रवाह की स्थिति काफी कमजोर हो गई है। हालांकि, गोकुल बैराज से 1300 क्यूसेक जलराशि डिस्चार्ज के लिए आवंटित होने के बावजूद यमुना नदी में प्रवाह की स्थिति लगभग शून्य बनी हुई है। अन्य नदियों को बरसाती नदियों के रूप में माना जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप जल का संकट बढ़ रहा है।
यद्यपि ‘रेनीवेल’ प्रोजेक्ट से औद्योगिक परियोजनाओं के लिए पानी की आपूर्ति बेहतर हो सकेगी, लेकिन यमुना नदी के प्रवाह पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इस बारे में फिलहाल कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस प्रोजेक्ट की प्रभावकारिता और संभावित पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर सरकार और संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द एक व्यापक इम्पैक्ट रिपोर्ट जारी करनी चाहिए।
