सुल्तान आब्दी,अग्र भारत संवाददाता
झांसी। जनपद में इन दिनों प्लाटिंग जमीनों की बिक्री के नाम पर भूमि पूजन और भव्य कार्यक्रमों का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। कोई अपनी प्लाटिंग को वीआईपी एरिया बता रहा है तो कोई मुख्य हाईवे से सटी होने का दावा कर रहा है, वहीं कुछ लोग नगर से दूर सुकून भरी लोकेशन का सपना दिखाकर आम लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
हाल ही में नगर से बाहर मुख्य हाईवे से लगी एक प्लाटिंग साइड का भूमि पूजन कार्यक्रम बड़े ही अनोखे अंदाज में आयोजित किया गया, जिसका व्यापक प्रचार-प्रसार सोशल मीडिया पर किया गया। चमक-दमक और आकर्षक दावों के बीच लोगों को प्लाटिंग साइड तो अच्छी लगी, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या आम नागरिक यह जान भी पा रहे हैं कि वह प्लाटिंग जेडीए से स्वीकृत है या नहीं?सूत्रों की मानें तो कई ऐसी प्लाटिंग साइड्स सामने आ रही हैं, जो न तो झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) से अप्रूव हैं और न ही उनके दस्तावेज पूरी तरह वैध हैं। बावजूद इसके, भूमि पूजन, बैनर-पोस्टर और सोशल मीडिया प्रचार के जरिये लोगों में भरोसा पैदा किया जा रहा है।आम ग्राहक अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी और अपने सपनों का घर बनाने की उम्मीद में प्लाट खरीद लेता है, लेकिन कुछ समय बाद ही पूरी साइड पर कोई न कोई विवाद या कानूनी अड़चन सामने आ जाती है। न रजिस्ट्री आगे बढ़ती है, न कब्जा मिलता है और न ही जमा की गई रकम वापस हो पाती है। इस बीच प्लाटिंग बेचने वाले लोग मालामाल हो जाते हैं और ग्राहक सालों तक दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर रहता है।सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस तरह की प्लाटिंग के जाल में फंसकर कई परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इस ओर ध्यान देगा या यूं ही भूमि पूजन की आड़ में आमजन को ठगा जाता रहेगा?कई प्लाटिंग साइड ऐसी हैं, जिनके न तो ले-आउट प्लान स्वीकृत हैं, न ही सड़क, नाली, पानी और सीवर जैसी मूलभूत सुविधाओं की कोई व्यवस्था। इसके बावजूद प्रशासनिक अनदेखी के चलते इन्हें वैध बताकर बेचा जा रहा है।जनहित में आवश्यकता है कि प्रशासन अवैध प्लाटिंग पर सख्ती करे और आम लोगों को जागरूक किया जाए, ताकि उनके सपनों का घर किसी धोखे की भेंट न चढ़े
