जालौन से दिल्ली तक 500 किमी की यमुना जल संवाद यात्रा का समापन। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने जल सहेलियों को सम्मानित किया और आगरा की यमुना समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया।
नई दिल्ली/आगरा: जल संरक्षण और नदियों को पुनर्जीवित करने के संकल्प के साथ जालौन से शुरू हुई ‘यमुना जल संवाद यात्रा’ का गुरुवार को दिल्ली के वासुदेव घाट पर भव्य समापन हुआ। 500 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर दिल्ली पहुंची इस यात्रा का नेतृत्व जल सहेली फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. संजय सिंह और यात्रा संयोजक मनीष राजपूत ने किया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के कैबिनेट जल शक्ति मंत्री श्री स्वतंत्र देव सिंह जी रहे।
जल सहेलियों का सम्मान: मंत्री ने की पुष्प वर्षा
समापन कार्यक्रम में एक भावुक और सम्मानजनक दृश्य देखने को मिला, जब जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने पदयात्रा कर दिल्ली पहुंचीं ‘जल सहेलियों’ का पाद-पक्षालन (चरण धोकर) किया। उन्होंने सहेलियों पर पुष्प वर्षा करते हुए कहा कि इन महिलाओं की तपस्या और परिश्रम व्यर्थ नहीं जाएगा। मंत्री जी ने आश्वासन दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार गंगा, यमुना और अन्य सहायक नदियों के कायाकल्प के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
आगरा की यमुना समस्याओं पर गंभीर चर्चा

यात्रा में आगरा का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रमुख यमुना सत्याग्रही पं. अश्विनी कुमार मिश्र और डॉ. धीरज मोहन सिंघल (यमुना सेवक) ने पिछले तीन दशकों से यमुना की अविरलता और निर्मलता के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मंत्री जी को आगरा में यमुना की वर्तमान दयनीय स्थिति और स्थानीय समस्याओं से अवगत कराया।

डॉ. धीरज मोहन सिंघल ने बताया कि आगरा की जनता लंबे समय से यमुना में स्वच्छ जल की प्रतीक्षा कर रही है। इस पर जल शक्ति मंत्री ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया कि आगरा की समस्याओं का निवारण अब सरकार की प्राथमिकताओं में है और जल्द ही इसके परिणाम धरातल पर दिखाई देंगे।
नदियों के लिए सरकार का ‘एक्शन प्लान’

संबोधन के दौरान मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने सरकार की भावी योजनाओं का खाका खींचा:
STP प्लांट का विस्तार: शहरों के गंदे नालों को टैप कर नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाए जा रहे हैं।
सिंचाई में पुनर्चक्रण: उपचारित पानी (Treated Water) को सिंचाई के उपयोग में लाया जाएगा ताकि नदियों पर दबाव कम हो।
सहायक नदियों का पुनरुद्धार: मुख्य नदियों के साथ-साथ उनकी सहायक नदियों को जीवंत करने के लिए सरकार सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करेगी।
500 किमी का सफर, तीन राज्यों में संवाद
यह यात्रा जालौन जिले से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों, हरियाणा के कुछ हिस्सों और अंत में दिल्ली पहुंची। इस दौरान ‘जल सहेलियों’ ने ग्रामीणों और शहरी आबादी के साथ जल संवाद किया, जिससे जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता पैदा हुई।
