मथुरा – मथुरा के सौंख रोड स्थित होटल बीपी एमराल्ड में आज आयोजित होने वाले अखिल भारतीय जाट महासभा के प्रांतीय अधिवेशन से पहले ही विवादों का दौर शुरू हो गया है। अधिवेशन का मकसद जहां आरक्षण बहाली की रणनीति, सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन और संगठनात्मक मजबूती बताया गया, वहीं जाट समाज के भीतर से इसकी वैधता और उद्देश्य पर तीखे सवाल उठने लगे हैं।
संगठन के भीतर फूटा असंतोष
इस अधिवेशन को लेकर जाट समाज के ही व्हाट्सएप ग्रुपों पर गर्मागर्म बहस छिड़ी हुई है। आगरा इकाई के जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने बताया कि अधिवेशन में उत्तर प्रदेश की सभी जिला कार्यसमितियों, महिला और युवा शाखाओं की अनिवार्य भागीदारी है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय महासचिव चौधरी युद्धवीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
लेकिन अधिवेशन की पूर्व संध्या पर ही वरिष्ठ जाट नेता कुंवर शैलराज सिंह सहित कई समाजसेवियों ने इसकी वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे ‘तथाकथित शक्ति प्रदर्शन’ करार दिया है।
“यह असली अधिवेशन नहीं” – कुंवर शैलराज सिंह
महासभा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके कुंवर शैलराज सिंह ने कहा, “यह कोई वास्तविक अधिवेशन नहीं है। इसमें वे लोग शामिल हैं जिनका समाज की समस्याओं जैसे आरक्षण, दहेज, मृत्यु भोज या नशा मुक्ति से कोई लेना-देना नहीं है। केवल राजनीति चमकाने और निजी हित साधने के लिए यह मंच बना दिया गया है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महासचिव युद्धवीर सिंह और प्रदेश अध्यक्ष प्रताप चौधरी को कुछ समय पहले संगठन से निलंबित किया गया था, बावजूद इसके वे अधिवेशन का नेतृत्व कर रहे हैं।
स्थानीय नेतृत्व की उपेक्षा से असंतोष
मथुरा जैसे जाट बहुल क्षेत्र में आयोजित इस अधिवेशन में स्थानीय प्रभावशाली नेताओं को आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे असंतोष और गहरा गया है। राजीव वर्मा ने सवाल उठाया, “क्या यह अधिवेशन केवल औपचारिकता बनकर रह गया है? स्थानीय कार्यकर्ताओं की भागीदारी कहां है?”
संगठन में अंदरूनी विफलता
वरिष्ठ सदस्यों ने खुलकर कहा कि आज संगठन केवल चाटुकारों और दलालों का अड्डा बनकर रह गया है। “अब यहां असली समाजसेवकों की कोई जगह नहीं, केवल राजनीतिक चेहरों का बोलबाला है,” ऐसा मानना है कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का।
रामवीर सिंह तोमर ने कटाक्ष करते हुए लिखा, “जाट सम्मेलनों में अब सिर्फ मंचीय भाषण और फोटो सेशन होते हैं, असली समस्याओं पर चर्चा नहीं होती।”
आंकड़े बोलते हैं
एडवोकेट कुंवर शैलराज सिंह के अनुसार, मथुरा, आगरा और हाथरस-सादाबाद क्षेत्र में करीब 17 लाख जाट वोटर हैं, जबकि पूरे उत्तर प्रदेश में यह संख्या 35 लाख से अधिक है। इसके बावजूद महज 200 लोगों की क्षमता वाले होटल में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है – यह आयोजन की गंभीरता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
सामाजिक समस्याओं की अनदेखी
अधिवेशन में समाज की जमीनी समस्याएं जैसे शिक्षा, नशा मुक्ति, फिजूलखर्ची, पंचायत व्यवस्था की निष्क्रियता – इन पर कोई ठोस रणनीति नहीं दिखती। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि गरीब जाट अपनी जमीन बेचने को मजबूर है, जबकि संपन्न वर्ग समाज से कट चुका है।
समाज को चाहिए पारदर्शी और सक्रिय नेतृत्व
कई बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों ने इस अधिवेशन पर चिंता जताते हुए कहा कि सिर्फ मंचीय भाषणों और शक्ति प्रदर्शन से जाट समाज का भला नहीं होगा। जरूरत है पारदर्शी, निष्पक्ष और जमीनी स्तर पर सक्रिय नेतृत्व की, जो वास्तव में समाज के उत्थान के लिए कार्य करे।
