जबलपुर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर बेंच ने भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले प्रदेश के मंत्री श्री विजय शाह के विरुद्ध स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने इस मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए पुलिस महानिदेशक को मंत्री के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि यह कार्रवाई आज यानी 14 मई 2025 की शाम तक पूरी की जानी चाहिए, अन्यथा अगली सुनवाई में पुलिस महानिदेशक के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही पर विचार किया जाएगा।
सेना का अपमान बर्दाश्त नहीं
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि भारतीय सशस्त्र बल देश की उन अंतिम संस्थाओं में से है जो ईमानदारी, सेवा, अनुशासन, बलिदान, निस्वार्थता, चरित्र, सम्मान और अविचल साहस के प्रतीक हैं। न्यायालय ने जोर देकर कहा कि ऐसा कोई भी नागरिक जो इन मूल्यों को मानता है, इनसे स्वयं को जुड़ा हुआ महसूस करता है। मंत्री श्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी के प्रति “गटर जैसी भाषा” का प्रयोग इन सभी मूल्यों का अपमान है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
ऑपरेशन सिंदूर और कर्नल कुरैशी
न्यायालय ने अपने आदेश में इस बात का भी उल्लेख किया कि कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ, पाकिस्तान के विरुद्ध सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए महत्वपूर्ण ऑपरेशन सिंदूर की राष्ट्रीय मीडिया ब्रीफिंग की मुख्य अधिकारी थीं। ऐसे प्रतिष्ठित अधिकारी के प्रति मंत्री की आपत्तिजनक टिप्पणी न केवल व्यक्तिगत रूप से उनका अपमान है, बल्कि संपूर्ण सशस्त्र बलों के मनोबल को भी ठेस पहुँचाती है।
मंत्री की आपत्तिजनक टिप्पणी
डॉ. आंबेडकर नगर, महू के रायकुंडा ग्राम में 13 मई 2025 को आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह ने परोक्ष रूप से टिप्पणी करते हुए कहा था कि “प्रधानमंत्री आतंकवादियों की बहन को भेजते हैं उन्हें सुधारने के लिए।” न्यायालय ने स्पष्ट रूप से माना कि यह टिप्पणी कर्नल कुरैशी की ओर इशारा करती है। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कर्नल कुरैशी पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की हत्या करने वाले आतंकवादियों की बहन हैं। न्यायालय ने इस टिप्पणी को अत्यंत आपत्तिजनक और निंदनीय बताया है।
विधिक आधार और न्यायालय के निर्देश
उच्च न्यायालय ने मंत्री श्री विजय शाह के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 के निम्नलिखित अनुच्छेदों के तहत एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है:
* अनुच्छेद 152: देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के विरुद्ध अलगाववाद, विद्रोह या विध्वंसकारी गतिविधियों को उत्तेजित करना।
* अनुच्छेद 196(1)(b): धर्म, जाति, भाषा आदि के आधार पर द्वेष, घृणा या वैमनस्य को बढ़ावा देना जिससे सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है।
* अनुच्छेद 197(1)(c): राष्ट्रीय एकता के विरुद्ध दुष्प्रचार करना, जिससे सामाजिक अशांति, नफरत और द्वेष को बढ़ावा मिले।
न्यायालय ने महाधिवक्ता कार्यालय को भी निर्देश दिया है कि वे इस आदेश की प्रति तत्काल पुलिस महानिदेशक को भेजें। इसके अतिरिक्त, न्यायालय के सूचना प्रौद्योगिकी (I.T.) रजिस्ट्रार को मंत्री श्री विजय शाह के आपत्तिजनक भाषण वाले वीडियो का लिंक और अन्य डिजिटल प्रमाण संकलित करने का निर्देश दिया गया है।
जनता में संतोष की लहर
उच्च न्यायालय के इस त्वरित और सख्त आदेश से आम जनता और खासकर सैन्य समुदाय में संतोष की लहर दौड़ गई है। लोगों का मानना है कि देश की रक्षा में दिन-रात लगे रहने वाले वीर जवानों का अपमान किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है और न्यायालय ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करके एक सराहनीय उदाहरण पेश किया है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस महानिदेशक उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए मंत्री श्री विजय शाह के विरुद्ध कब तक एफआईआर दर्ज करते हैं। न्यायालय ने स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की है, जिससे इस मामले में त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है। यह घटनाक्रम निश्चित रूप से देश के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डालेगा और यह संदेश देगा कि देश का सम्मान और सैनिकों का गौरव सर्वोपरि है।
