मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में पिछले महीने हुई हिंसा को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के दौरान हुए हमलों में हिन्दुओं को विशेष रूप से निशाना बनाया गया था।
यह रिपोर्ट न केवल हिंसा की भयावहता को उजागर करती है, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाती है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- हिन्दुओं को बनाया निशाना: रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंसा के दौरान हिन्दुओं को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया।
- पुलिस निष्क्रिय और अनुपस्थित: जब लोगों ने मदद के लिए पुलिस को पुकारा, तो पुलिस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। रिपोर्ट में स्थानीय पुलिस को “पूरी तरह से निष्क्रिय और अनुपस्थित” बताया गया है, खासकर धुलियान में 11 अप्रैल को हुए मुख्य हमले के दौरान।
- बड़े पैमाने पर आगजनी और लूटपाट: रिपोर्ट में आगजनी और लूटपाट के साथ ही दुकानों और मॉलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने का भी लगातार उल्लेख किया गया है। बेतबोना गांव में 113 घर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे।
तृणमूल कांग्रेस के नेता की संलिप्तता
सबसे सनसनीखेज खुलासा यह है कि रिपोर्ट में बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के एक स्थानीय पार्षद (मेहबूब आलम) की इस हिंसा में संलिप्तता का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, “हमले स्थानीय पार्षद मेहबूब आलम द्वारा निर्देशित थे।”
यह रिपोर्ट, जो एनडीटीवी द्वारा एक्सेस की गई है और आज (20 मई, 2025) हाई कोर्ट की खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई, मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के पीछे की सच्चाई को सामने लाती है। जांच समिति में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण और न्यायिक सेवाओं के सदस्य शामिल थे।
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के विरोध में मुर्शिदाबाद जिले में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके परिणामस्वरूप कम से कम तीन मौतें, दर्जनों लोग घायल हुए और संपत्ति का भारी नुकसान हुआ था।
