झाँसी: बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीति को खत्म करने के लिए झाँसी मंडल में एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। मंडलायुक्त श्री बिमल कुमार दुबे की अध्यक्षता में श्रम विभाग ने यूनिसेफ के सहयोग से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य झाँसी मंडल को 26 जनवरी 2026 तक बाल श्रम मुक्त बनाना है। मंडलायुक्त ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी विभागों से समन्वय और सहयोग की अपील की है।
अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर

मंडलायुक्त ने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन के लिए विभिन्न विभागों, जैसे श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, समाज कल्याण और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय होना सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि इस कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का नैतिक दायित्व है कि वह बाल श्रम को रोकने में अपना योगदान दे।
तकनीक और जागरूकता का इस्तेमाल
कार्यशाला में मंडलायुक्त ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए:
- ड्रॉपआउट बच्चों की ट्रैकिंग: शिक्षा विभाग को अगले 15 दिनों में स्कूल छोड़ने वाले सभी बच्चों का डेटा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। तकनीक का उपयोग करके ऐसे बच्चों और उनके परिवारों की निगरानी की जाएगी, ताकि वे बाल श्रम में न फंसें।
- जागरूकता अभियान: मंडलायुक्त ने मीडिया से बाल श्रम के खिलाफ एक सशक्त जागरूकता अभियान चलाने की अपील की। इसके अलावा, एक मजबूत संदेश और संचार अभियान भी शुरू किया जाएगा।
- स्व-घोषणा अनिवार्य: प्रत्येक औद्योगिक प्रतिष्ठान, रेस्तरां और दुकानदार के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपने परिसर में यह स्टीकर लगाएं कि उनके यहाँ कोई बाल मजदूर कार्यरत नहीं है। व्यापार मंडल को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
बाल तस्करी और श्रमिक पोर्टल पर भी चर्चा
मंडलायुक्त ने मानव और बाल तस्करी को एक गंभीर समस्या बताते हुए इसे रोकने के लिए ठोस प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने श्रमिक पोर्टल पर श्रमिकों के पंजीकरण की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाया जा सके।
कार्यशाला में वी.वी. गिरि राष्ट्रीय श्रम संस्थान की डॉ. हेलेन आर. सेकर ने बाल श्रम से जुड़े विभिन्न कानूनों और इसके दुष्प्रभावों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने झांसी के आस-पास के क्षेत्रों में पीतल, ताला, कालीन और कांच उद्योगों में बाल श्रम की स्थिति पर भी प्रकाश डाला।
यूनिसेफ के राज्य समन्वयक रिजवान अली ने कार्यशाला के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करना और सभी विभागों के बीच सहयोग स्थापित करना है, ताकि जमीनी स्तर पर सेवाएँ प्रभावी ढंग से पहुँच सकें।
इस कार्यशाला में झांसी, जालौन और ललितपुर जिलों के विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिसमें उप श्रमायुक्त किरण मिश्रा, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार और अन्य अधिकारी शामिल थे।
