झाँसी उत्तर प्रदेश
सुल्तान आब्दी
स्मार्ट सिटी योजना की बदहाली: लाखों खर्च के बाद भी क्षेत्र बना अव्यवस्था और शराबियों का अड्डा
स्मार्ट सिटी की रौनक फीकी, जनता के पैसे की हुई बर्बादी
झाँसी। स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत झाँसी नगर निगम द्वारा मेडिकल क्षेत्र एवं बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के समीप सड़क के एक ओर विकसित किया गया स्मार्ट सिटी कॉरिडोर आज बदहाली की मिसाल बन चुका है। जिस स्थान पर नगर निगम ने लाखों रुपये खर्च कर बैठने की आधुनिक व्यवस्था, आकर्षक लाइटिंग, फव्वारे, प्लेटफॉर्म और सौंदर्यीकरण कराया था, वही क्षेत्र अब उपेक्षा, अव्यवस्था और सामाजिक अवांछनीय गतिविधियों का केंद्र बन गया है।
योजना के प्रारंभिक महीनों में यह इलाका स्मार्ट सिटी की रौनक बढ़ाता नजर आया। शाम होते ही लाइटिंग और फव्वारों से क्षेत्र आकर्षण का केंद्र बनता था और स्थानीय लोग तथा राहगीर वहां बैठकर समय बिताते थे। लेकिन कुछ ही समय बाद जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और नियमित देखरेख के अभाव में निर्मित संरचनाएं टूटने लगीं। फव्वारे बंद हो गए, लाइटिंग खराब हो गई और बैठने के प्लेटफॉर्म क्षतिग्रस्त हो गए।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि अब यह स्थान शराबियों का अड्डा बन चुका है। रोज़ाना रात के समय असामाजिक तत्व यहां खुलेआम शराबखोरी करते हैं, जिससे आसपास रहने वाले नागरिकों, राहगीरों और विश्वविद्यालय के छात्रों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। कई बार झगड़े और गंदगी की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है, जिससे क्षेत्र की छवि और सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम ने जनता के टैक्स के पैसों को पानी की तरह बहाया, लेकिन उसके संरक्षण और निगरानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की। लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत के चलते सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। आमजन इसे “चोर-चोर मौसेरे भाई” की कहावत से जोड़कर देख रहे हैं, जहां सब मिलकर जनता के पैसों और सरकारी खजाने का लाभ उठा रहे हैं।
अब आम जनमानस मांग कर रहा है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत बनाई गई इस संपत्ति को पुनः दुरुस्त कर आम जनता के उपयोग के योग्य बनाया जाए। अन्यथा स्मार्ट सिटी जैसी महत्वाकांक्षी योजना केवल कागजों और उद्घाटन तक ही सीमित रह जाएगी।

झाँसी की स्मार्ट सिटी परियोजना यह संदेश दे रही है कि बड़े पैमाने पर निवेश के बावजूद अगर देखभाल और निगरानी नहीं की गई तो परिणाम केवल बर्बादी और अव्यवस्था के रूप में सामने आते हैं। अब सवाल यह है कि क्या नगर निगम और जिम्मेदार अधिकारी जनता की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे या यह क्षेत्र और लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार बना रहेगा।

