जैथरा (एटा)। क्षेत्र में किसानों से अनाज खरीद के दौरान कथित घटतौली का खेल चर्चा का विषय बना हुआ है। किसानों का आरोप है कि कुछ गल्ला व्यापारियों ने गांव-गांव अपने एजेंट फैला रखे हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक कांटों में रिमोट कंट्रोल तकनीक का इस्तेमाल कर वजन कम दिखाकर किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा है और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में गेहूं, मक्का और अन्य फसलों की खरीद के दौरान एजेंट सीधे किसानों से संपर्क करते हैं। नकद भुगतान और वाजिब मूल्य का लालच देकर फसल खरीद ली जाती है। किसानों का आरोप है कि तौल के समय इलेक्ट्रॉनिक कांटों में कथित रूप से रिमोट डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे वास्तविक वजन से कई किलो कम वजन दर्ज होता है। इसका सीधा नुकसान किसानों की जेब पर पड़ता है।
किसानों का कहना है कि एक-दो बोरी में होने वाली मामूली घटतौली का पता नहीं चलता, लेकिन पूरी ट्रॉली की तौल में यह अंतर काफी बढ़ जाता है। इससे प्रत्येक ट्रॉली पर किसानों को हजारों रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विरोध करने पर एजेंट खरीद से इनकार कर देते हैं या भुगतान में देरी की बात कहकर दबाव बनाते हैं।
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है और इसकी शिकायतें समय-समय पर प्रशासन तक पहुंचती रही हैं। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ऐसे कारोबारियों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि गांवों में होने वाली निजी खरीद की नियमित निगरानी कराई जाए और इलेक्ट्रॉनिक कांटों की तकनीकी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
जानकारों का कहना है कि यदि इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनों में किसी प्रकार की छेड़छाड़ की जाती है तो यह कानूनन अपराध है, किसानों के आर्थिक हितों के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है। ऐसे मामलों में माप-तौल विभाग और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई जरूरी है।
जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते इस कथित खेल पर रोक नहीं लगी तो किसानों की मेहनत की कमाई पर डाका पड़ता रहेगा और बिचौलियों का नेटवर्क और मजबूत होता जाएगा।
रिमोट से घटतौली का खेल! गांव-गांव फैले एजेंट, किसानों की गाढ़ी कमाई पर डाका
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