हाईवे पर सक्रिय कथित फाइनेंस एजेंटों के हौसले बुलंद, वाहन स्वामियों से मारपीट और जबरन वसूली के आरोप; पुलिस आयुक्त से गोपनीय जांच की मांग
अग्र भारत संवाददाता
आगरा। थाना सिकंदरा क्षेत्र में कथित अवैध फाइनेंस एजेंटों की गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि फाइनेंस कंपनियों के नाम पर कार्य कर रहे कुछ लोग बिना वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए हाईवे और प्रमुख मार्गों पर वाहनों को रोककर कब्जे में ले रहे हैं। आरोप है कि विरोध करने पर वाहन स्वामियों और उनके परिजनों के साथ अभद्रता, धमकी और मारपीट की घटनाएं भी हो रही हैं।रुनकता चौकी और थाने से चंद कदमों की दूरी पर खड़े रहते हैं अवैध फाइनेंस एजेंट ,उक्त मामले को लेकर पुलिस आयुक्त से गोपनीय जांच कराकर कथित अवैध फाइनेंस एजेंटों तथा यदि किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता सामने आए तो उनके विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नगर क्षेत्र से लेकर देहात तक दर्जनों लोग कथित रूप से फाइनेंस एजेंट बनकर सक्रिय हैं। आरोप है कि इनमें से अधिकांश के पास न तो कोई अधिकृत पहचान पत्र होता है और न ही वाहन जब्ती संबंधी वैध दस्तावेज। इसके बावजूद वे नियमों को ताक पर रखकर बकाया किश्तों का हवाला देकर हाईवे पर ही वाहनों को रोकने और कब्जे में लेने की कार्रवाई करते दिखाई देते हैं।हाल ही में थाना सिकंदरा क्षेत्र में एक परिवार के साथ हुई घटना को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि टूंडला निवासी एक परिवार की कार को महिंद्रा शोरूम के सामने दो वाहनों से घेरकर रोक लिया गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि सात से आठ लोगों ने स्वयं को फाइनेंस कंपनी से जुड़ा बताते हुए वाहन की किस्त बकाया होने की बात कही और कार को जबरन अपने कब्जे में ले लिया। परिवार का दावा है कि उन्होंने बीते माह ही किस्त का भुगतान किया था। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई तथा उन्हें एक बंद पड़े पेट्रोल पंप तक ले जाकर दबाव बनाया गया।आरोप है कि वहां उनसे मनमाफिक बयान दिलवाकर वीडियो भी बनाया गया।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना की शिकायत स्थानीय पुलिस समेत उच्च अधिकारियों से की गई, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि मामले में निष्पक्ष जांच के बजाय कथित एजेंटों को संरक्षण दिया गया।स्थानीय लोगों का दावा है कि कीठम स्थित सूरसरोवर पक्षी विहार के पास ,रुनकता चौकी के पास फुट क्रॉसिंग के नीचे ,थाने से कुछ ही दूरी चुंगी चौराहा, सिकंदरा चौराहा, बोदला रोड, इंडस्ट्रियल एरिया तथा अन्य स्थानों पर ऐसे कथित एजेंटों की सक्रियता खुलेआम देखी जा सकती है। आरोप है कि हाईवे पर वाहनों की निगरानी कर उन्हें रोकने और कब्जे में लेने का कार्य लंबे समय से किया जा रहा है।जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि वाहन ऋण वसूली और वाहन जब्ती की एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया होती है, लेकिन कुछ लोग न्यायालय और नियामक संस्थाओं के दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर मनमाने तरीके से कार्रवाई कर रहे हैं। इससे आम नागरिकों में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।
एक स्थानीय जनप्रतिनिधि ने पुलिस उपायुक्त नगर सैयद अली अब्बास से पूरे प्रकरण की गोपनीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी अथवा कथित अवैध फाइनेंस एजेंट की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
