तीनों तहसीलों में उर्वरक प्रतिष्ठानों की सघन जांच, दो नमूने फेल होने की आशंका में लैब भेजे, एक विक्रेता को नोटिस
एटा। खरीफ सीजन के बीच खाद की कालाबाजारी और ओवररेटिंग की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने गुरुवार को पूरे जनपद में एक साथ छापेमारी अभियान चलाया। जिलाधिकारी अरविंद सिंह के निर्देश पर सदर, अलीगंज और जलेसर तहसीलों में संयुक्त टीमों ने उर्वरक प्रतिष्ठानों और सहकारी समितियों पर पहुंचकर स्टॉक, बिक्री और अभिलेखों की गहन जांच की। कार्रवाई के दौरान दो उर्वरकों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए, जबकि रिकॉर्ड में अनियमितता मिलने पर एक विक्रेता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
उपजिलाधिकारियों के नेतृत्व में कृषि विभाग की टीमों ने थोक और फुटकर खाद विक्रेताओं के यहां स्टॉक रजिस्टर, कैश मेमो, पीओएस मशीन, लाइसेंस, मूल्य सूची और बिक्री अभिलेखों का मिलान किया। अधिकारियों ने यह भी देखा कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है या नहीं।
जांच के दौरान दो उर्वरकों के नमूने लेकर गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। वहीं एक प्रतिष्ठान पर अभिलेख अधूरे मिलने पर विक्रेता से स्पष्टीकरण तलब किया गया। अधिकारियों ने सभी विक्रेताओं को सख्त चेतावनी दी कि बिना पीओएस मशीन के बिक्री, ओवररेटिंग, टैगिंग या जमाखोरी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने कहा कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। यदि खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी, ओवररेटिंग या अन्य अनियमितता सामने आती है तो संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में और उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. मनवीर सिंह ने बताया कि जनपद में फिलहाल 27,354 मीट्रिक टन यूरिया, 11,642 मीट्रिक टन डीएपी और 4,379 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है। किसानों से अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद खरीदें, खरीद का बिल अवश्य लें और कहीं भी ओवररेटिंग या कालाबाजारी की सूचना मिलने पर तत्काल कृषि विभाग या जिला प्रशासन को अवगत कराएं।
