आगरा के डौकी क्षेत्र से सीबीआई (CBI) ने कृषि भवन का फर्जी अधिकारी बनकर ठगी करने वाले शातिर अपराधी को गिरफ्तार किया है। डिजिटल जाल बिछाकर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा गया। जानिए कैसे करता था फर्जी QR कोड से ठगी।
- लोन मंजूरी और सरकारी कार्रवाई का डर दिखाकर वसूली
- आगरा में सनसनी: खेत में सामूहिक दुष्कर्म का वीडियो वायरल होने पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो आरोपी हिरासत में
- फर्जी QR कोड और डिजिटल पेमेंट का करता था इस्तेमाल
- सीबीआई का ‘डिजिटल जाल’ और गिरफ्तारी
- बैंक खातों और कॉल डिटेल्स से खंगाला जा रहा है पूरा नेटवर्क
- जांच एजेंसियों की जनता से अपील: सतर्क रहें
आगरा। देश की प्रतिष्ठित जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उत्तर प्रदेश के आगरा में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ठगी के एक बड़े खेल का पर्दाफाश किया है। सीबीआई की टीम ने आगरा के डौकी क्षेत्र से एक ऐसे शातिर मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है, जो खुद को नई दिल्ली के ‘कृषि भवन’ का बड़ा सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को चूना लगा रहा था।
यह आरोपी सरकारी योजनाओं और विभिन्न प्रकार के लोन (Loan) स्वीकृत कराने का झांसा देकर भोले-भाले लोगों से लाखों रुपये की कमीशन वसूलता था। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने इस बार पारंपरिक नहीं, बल्कि एक आधुनिक ‘डिजिटल ट्रैप’ (Digital Trap) बिछाकर आरोपी को रंगे हाथ दबोच लिया।
लोन मंजूरी और सरकारी कार्रवाई का डर दिखाकर वसूली
सीबीआई की प्राथमिक जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं। आरोपी का तौर-तरीका (Modus Operandi) कुछ इस प्रकार था:
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फर्जी पहचान: आरोपी लोगों को फोन कर खुद को कृषि भवन का वरिष्ठ अधिकारी बताता था ताकि लोग आसानी से उसकी बातों में आ जाएं।
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लोन का लालच: वह विभिन्न सरकारी योजनाओं और सब्सिडी वाले ऋणों को जल्द से जल्द मंजूर कराने का झांसा देकर फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर मोटी कमीशन मांगता था।
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कार्रवाई का खौफ: जो लोग उसकी बात नहीं मानते थे, उन्हें वह सरकारी जांच और कानूनी कार्रवाई की धौंस दिखाकर डराता था और जबरन अवैध वसूली करता था।
आगरा में सनसनी: खेत में सामूहिक दुष्कर्म का वीडियो वायरल होने पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो आरोपी हिरासत में
फर्जी QR कोड और डिजिटल पेमेंट का करता था इस्तेमाल
आजकल के डिजिटल दौर का फायदा उठाते हुए इस ठग ने तकनीकी रास्ते अपनाए थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपी सीधे बैंक अकाउंट नंबर देने के बजाय पीड़ितों को फर्जी क्यूआर कोड (QR Code) भेजता था।
जैसे ही पीड़ित उस क्यूआर कोड को स्कैन कर पैसे ट्रांसफर करते थे, वह रकम सीधे आरोपी और उसके गिरोह से जुड़े अलग-अलग बैंक खातों में पहुंच जाती थी। सीबीआई को जांच के दौरान आरोपी के पास से कई संदिग्ध मोबाइल नंबर और बैंक खातों की डिटेल मिली है, जिनकी लेनदेन (Transaction History) खंगाली जा रही है।
सीबीआई का ‘डिजिटल जाल’ और गिरफ्तारी
इस मामले की भनक लगते ही सीबीआई की विंग सक्रिय हो गई। आरोपी को पकड़ने के लिए तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) का सहारा लिया गया।
कैसे फंसा जाल में: सीबीआई के एक्सपर्ट्स ने एक डिजिटल जाल तैयार किया, जिसके जरिए आरोपी की लोकेशन और उसकी डिजिटल एक्टिविटी को ट्रैक किया गया। जैसे ही पुख्ता सबूत हाथ लगे, सीबीआई की टीम ने आगरा के डौकी इलाके में घेराबंदी कर आरोपी को दबोच लिया। मौके से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं।
बैंक खातों और कॉल डिटेल्स से खंगाला जा रहा है पूरा नेटवर्क
सीबीआई के अधिकारियों को आशंका है कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पूरा संगठित गिरोह (Organized Gang) काम कर रहा है।
| जांच के मुख्य बिंदु | सीबीआई की अगली रणनीति |
| बैंक खाते (Bank Accounts) | पैसे किन-किन खातों में ट्रांसफर हुए और उनका असली मालिक कौन है। |
| कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) | आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था और उसके साथी कहां छिपे हैं। |
| इलेक्ट्रॉनिक उपकरण | जब्त किए गए मोबाइल और लैपटॉप से डेटा रिकवर करना। |
एजेंसी अब इस बात का पता लगा रही है कि इस नेटवर्क के तार कहां-कहां जुड़े हैं और इस गिरोह ने अब तक देश के कितने लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाया है।
जांच एजेंसियों की जनता से अपील: सतर्क रहें
इस मामले के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने आम नागरिकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है:
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किसी भी सरकारी विभाग या अधिकारी के नाम पर आने वाले संदिग्ध फोन कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें।
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लोन या सरकारी योजना के नाम पर किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड (QR Code) को स्कैन न करें।
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कोई भी वित्तीय लेनदेन करने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या कार्यालय में जाकर सत्यता की पुष्टि अवश्य करें।
