करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था। उद्घाटन के महज 14 दिन बाद सड़क धंसने की घटना पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने सख्त कदम उठाए। अधिकारी ब्लैकलिस्ट: निर्माणकारी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर और स्वतंत्र इंजीनियर के टीम लीडर समेत 3 अधिकारियों को 2 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है।
लखनऊ: उद्घाटन के महज 14 दिन बाद ही बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उन्नाव के कोरारी क्षेत्र में सड़क का हिस्सा धंसने की घटना ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया था। इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने बड़ी कार्रवाई की है और लापरवाही बरतने वाले तीन जिम्मेदार अधिकारियों को दो वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
किन अधिकारियों पर गिरी गाज?
एनएचएआइ ने परियोजना में गंभीर लापरवाही और मॉनिटरिंग में चूक मानते हुए निम्नलिखित अधिकारियों को अगले दो वर्षों तक के लिए किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया है:
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विवेक कुमार गुप्ता (प्रोजेक्ट मैनेजर-सह-डीजीएम हाइवे, निर्माणकारी संस्था)
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सुरेंद्र कुमार (टीम लीडर, स्वतंत्र इंजीनियर)
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यतेंद्र कुमार (रेसिडेंट इंजीनियर)
इन तीनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से इस परियोजना से हटा दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
करीब 4200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन इसी साल 13 जुलाई को किया गया था। उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों बाद उन्नाव के कोरारी क्षेत्र के किलोमीटर संख्या 64 के पास सड़क का एक हिस्सा धंसने की खबर सामने आई थी। इस घटना का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित (वायरल) हो गया था, जिसके बाद एनएचएआइ हरकत में आया।
एनएचएआइ की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, बीती 26 जुलाई को नियमित रूट पेट्रोलिंग के दौरान सड़क की सतह में ‘स्लिपेज’ (खिसकाव) देखा गया था। सूचना मिलते ही एनएचएआइ और निर्माणकारी संस्था की तकनीकी टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया।
तकनीकी जांच में क्या सामने आया?
एनएचएआइ के तकनीकी निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि:
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यह समस्या केवल सड़क की ऊपरी बिटुमिनस परत (पक्की सतह) तक ही सीमित थी।
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पुल की नींव, सब-स्ट्रक्चर और सुपर-स्ट्रक्चर पूरी तरह से सुरक्षित पाए गए हैं। इनमें किसी भी प्रकार की संरचनात्मक (स्ट्रक्चरल) क्षति या गंभीर निर्माण संबंधी कमी नहीं पाई गई।
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प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, मानसून के दौरान लगातार भारी यातायात का दबाव, नमी में बदलाव और जोड़ों (ज्वाइंट्स) के रास्ते वर्षा जल के प्रवेश के कारण इस प्रकार की मामूली समस्या उत्पन्न हुई थी।
तुरंत की गई सुधारात्मक कार्रवाई
एनएचएआइ अधिकारियों के मुताबिक, निर्माणकारी संस्था के साथ हुए नियमित संचालन और रखरखाव समझौते के तहत सुधारात्मक कार्य तत्काल प्रभाव से शुरू कर दिए गए थे:
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प्रभावित क्षेत्र की क्षतिग्रस्त बिटुमिनस परत को पूरी तरह हटाकर नई परत बिछा दी गई है।
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भविष्य में सड़क के जोड़ों में वर्षा जल के प्रवेश को रोकने के लिए विशेष ज्वाइंट सीलिंग की गई है।
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जल निकासी व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार किए गए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर यातायात पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित हो रहा है। यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
