आगरा में तीन वर्षों से जमीन की पैमाइश के लिए परेशान किसान रामप्रकाश को डीएम मनीष बंसल के हस्तक्षेप से न्याय मिला। खुशी में किसान जनता दर्शन पहुंचकर जंगली ककोड़े भेंट कर भावुक हो गया।
आगरा | तीन वर्षों तक अपनी जमीन की पैमाइश कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने वाले एक गरीब किसान की लंबी लड़ाई आखिरकार खत्म हो गई। न्याय मिलने की खुशी इतनी बड़ी थी कि किसान खुद को रोक नहीं पाया। शुक्रवार को आयोजित जनता दर्शन में वह जंगली ककोड़ों से भरा एक थैला लेकर जिलाधिकारी मनीष बंसल से मिलने पहुंचा। भावुक किसान ने डीएम से कहा, “साहब, पैमाइश हो गई। आपसे मिला तो एक ही बार में काम हो गया। यह जंगली ककोड़े आपके लिए लाया हूं। इन्हें लेने से मना मत करिए, नहीं तो मेरा दिल टूट जाएगा।”
किसान की सादगी, निश्छल भावनाओं और आभार व्यक्त करने के इस अनोखे अंदाज ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने मुस्कुराते हुए किसान की भावनाओं का सम्मान किया और कहा, “यह मेरा कर्तव्य था, लेकिन आपका यह इनाम मुझे हमेशा याद रहेगा।”
तीन वर्षों तक न्याय के लिए भटकता रहा किसान
जनता दर्शन के दौरान जिला मुख्यालय में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब बसई अरेला निवासी रामप्रकाश पुत्र रोशनलाल हाथ में जंगली ककोड़ों का थैला लेकर जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनकी कृषि भूमि की पैमाइश का मामला पिछले तीन वर्षों से लंबित था।
रामप्रकाश के अनुसार, उन्होंने कई बार राजस्व विभाग के अधिकारियों, लेखपाल और राजस्व निरीक्षक से संपर्क किया, लेकिन हर बार किसी न किसी बहाने से मामला टाल दिया गया। कई शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े।
संपूर्ण समाधान दिवस में रखी थी अपनी पीड़ा
रामप्रकाश ने बताया कि 6 जुलाई को तहसील बाह में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान उन्होंने अपनी समस्या सीधे जिलाधिकारी मनीष बंसल के सामने रखी थी। उन्होंने बताया कि तीन वर्षों से भूमि की पैमाइश नहीं हो रही है और संबंधित अधिकारी शिकायतों पर गलत रिपोर्ट लगाकर मामले को लंबित रख रहे हैं।
किसान की शिकायत सुनते ही जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने मौके पर ही संबंधित राजस्व निरीक्षक से जवाब-तलब किया और पैमाइश में हुई अनावश्यक देरी पर कड़ी नाराजगी जताई। साथ ही अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई कर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए।
डीएम के निर्देश के बाद पूरी हुई पैमाइश
जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद राजस्व विभाग हरकत में आया और किसान की भूमि की पैमाइश पूरी कर दी गई। वर्षों से लंबित विवाद का समाधान होने पर रामप्रकाश को बड़ी राहत मिली।
उन्होंने बताया कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी समस्या इतनी जल्दी हल हो जाएगी। किसान ने कहा कि यदि अधिकारी इसी तरह आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समय पर कार्रवाई करें तो गरीबों को न्याय पाने के लिए वर्षों तक भटकना नहीं पड़ेगा।
जंगली ककोड़ों से जताया आभार
न्याय मिलने की खुशी में रामप्रकाश खाली हाथ नहीं पहुंचे। उन्होंने अपने खेतों और जंगल से एकत्र किए गए जंगली ककोड़े जिलाधिकारी को भेंट करने की इच्छा जताई।
शुरुआत में जिलाधिकारी ने उपहार लेने में संकोच किया, लेकिन किसान भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यदि उनका यह छोटा-सा उपहार स्वीकार नहीं किया गया तो उनका दिल टूट जाएगा। किसान की सच्ची भावना और आत्मीयता देखकर जिलाधिकारी ने उनका उपहार स्वीकार किया और उनके इस स्नेह को जीवनभर याद रखने की बात कही।
जनता दर्शन में बना भावुक माहौल
इस पूरे घटनाक्रम ने जनता दर्शन में मौजूद अधिकारियों और आम नागरिकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। किसान की सादगी और प्रशासन के प्रति उसके विश्वास ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
कई लोगों ने इसे प्रशासन और जनता के बीच बढ़ते विश्वास का प्रतीक बताया। अधिकारियों का कहना है कि जनसुनवाई और जनता दर्शन का उद्देश्य भी यही है कि लोगों की समस्याओं का समयबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाए।
संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बनी घटना
रामप्रकाश की कहानी केवल एक किसान को न्याय मिलने की नहीं, बल्कि संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था की भी मिसाल बनकर सामने आई है। वर्षों से लंबित मामले का समाधान एक प्रभावी हस्तक्षेप के बाद संभव हुआ, जिससे यह संदेश गया कि यदि शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई हो तो आम नागरिकों का व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होता है।
गरीब किसान की सादगी, न्याय मिलने की खुशी और धन्यवाद देने का अनोखा तरीका जनता दर्शन का सबसे भावुक पल बन गया। यह घटना प्रशासन और आम जनता के बीच विश्वास, संवेदनशीलता और जवाबदेही का सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई।
