अछनेरा। थाना क्षेत्र के साधन गांव निवासी एक युवक ने थाना अछनेरा पुलिस पर मारपीट करने और रातभर हवालात में रखने का आरोप लगाया है। युवक का कहना है कि वह गुरुवार रात पुलिस हिरासत में लिए गए अपने दोस्त के बारे में जानकारी करने थाने पहुंचा था। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे थाने के कमरे में ले जाकर लात-घूंसों और डंडे से पीटा। बाद में उसका शांति भंग में चालान कर दिया गया। जमानत पर रिहा होने के बाद युवक ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
करण पुत्र महावीर के अनुसार, गुरुवार रात करीब दस बजे वह अपने एक साथी के साथ थाना अछनेरा पहुंचा था। उसका एक दोस्त पुलिस हिरासत में था। वहां मौजूद पुलिसकर्मी से उसने दोस्त को हिरासत में लेने का कारण पूछा तो उसे न्यायालय का वारंटी बताया गया। युवक का आरोप है कि पुलिसकर्मी ने उससे पांच हजार रुपये देने को कहा और सुबह एक जमानती लेकर किरावली आने की बात कही। रुपये देने से मना करने पर पुलिसकर्मी ने उसके साथ अभद्रता की और गाली-गलौज की।करण का आरोप है कि वह थाने से बाहर जाने लगा तो दो पुलिसकर्मी उसे घसीटकर अंदर ले गए और कमरे में लात-घूंसों तथा डंडे से मारपीट की। इसके बाद उसे रातभर हवालात में रखा गया। युवक के मुताबिक, रात करीब 12 बजे पुलिसकर्मी उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन वहां चिकित्सक मौजूद नहीं होने के कारण मेडिकल नहीं हो सका। स्टाफ के पास नाम दर्ज कराने के बाद पुलिस उसे वापस थाने ले आई और हवालात में बंद कर दिया।युवक का कहना है कि सुबह उसका शांति भंग में चालान कर सीएचसी किरावली में मेडिकल कराया गया और ग्रामीण न्यायालय किरावली भेज दिया गया। जमानत पर रिहा होने के बाद उसने पुलिसकर्मियों के खिलाफ तहरीर दी। युवक ने मेडिकल में शरीर पर चोटें आने का दावा करते हुए थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
एसीपी ने कहा, नशे में था युवक,,एसीपी अछनेरा शैलेंद्र सिंह ने बताया कि युवक नशे में था और पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज कर रहा था। रात में ही उसका मेडिकल कराने के लिए भेजा गया था, लेकिन चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने के कारण मेडिकल नहीं हो सका। युवक द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी।
वहीं, युवक ने पुलिस के नशे में होने के आरोप को गलत बताया है। उसका कहना है कि वह किसी प्रकार के नशे में नहीं था। उसने आरोप लगाया कि थाने के सीसीटीवी कैमरों में घटना की सच्चाई कैद है, इसलिए फुटेज की जांच कराकर निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए।
