पत्रकार सुमित गर्ग,
खेरागढ़। थाना खेरागढ़ क्षेत्र के पहाड़ीकलां गांव में 19 जून 2026 को हुई युवक नीलेश कुमार की आत्महत्या के मामले में करीब ढाई महीने बाद नया मोड़ सामने आया है। मृतक की मां जलदेवी की शिकायत पर न्यायालय के आदेश से खेरागढ़ पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि युवक से दो लाख रुपये की मांग की जा रही थी और रुपये न देने पर उसे दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
मृतक की मां जलदेवी ने न्यायालय में दी शिकायत में पड़ोस में रहने वाली साधना, उसके पिता हरीसिंह, मां रामवती और भाई अविनाश को नामजद किया है। शिकायत के अनुसार, साधना ने नीलेश से दोस्ती बढ़ाई और बाद में कथित तौर पर उससे दो लाख रुपये की मांग करने लगी। रुपये देने में असमर्थता जताने पर उसे कथित रूप से दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई।
जलदेवी का आरोप है कि बाद में साधना के परिवार के अन्य सदस्य भी नीलेश से रुपये मांगने लगे। नीलेश ने अपनी आर्थिक स्थिति खराब होने की बात कही, लेकिन इसके बावजूद कथित रूप से उस पर दबाव बनाया जाता रहा। शिकायत के मुताबिक, 19 जून की रात भी नीलेश के मोबाइल पर रुपये की मांग और धमकी दी गई। आरोप है कि उसे कथित तौर पर “पैसे दे दो या मर जाओ” जैसी बातें कही गईं।
बताया गया है कि उसी रात करीब 12 बजे नीलेश ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया। मृतक की मां का दावा है कि नीलेश के मोबाइल फोन में आरोपियों के साथ हुई कथित बातचीत के ऑडियो-वीडियो मौजूद हैं। पुलिस ने मोबाइल को अपने कब्जे में ले लिया है। ऐसे में विवेचना के दौरान डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पुलिस से न्यायालय तक पहुंचा मामला
जलदेवी के अनुसार, घटना के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया, लेकिन उनकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने 23 जून को रजिस्ट्री के माध्यम से पुलिस आयुक्त आगरा को शिकायत भेजी। कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
न्यायालय के आदेश के बाद थाना खेरागढ़ पुलिस ने साधना, हरीसिंह, रामवती और अविनाश के खिलाफ बीएनएस की धारा 108 और 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
पुलिस जांच में आरोपों की वास्तविकता, मोबाइल में मौजूद कथित ऑडियो-वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
