SIR को लेकर INDIA गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अंतरिम रोक, हटाए गए वोटरों के ऑडिट और चुनाव आयोग से दस्तावेज पेश करने की मांग की।
- सुप्रीम कोर्ट तक निकाला विरोध मार्च
- SIR से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने की मांग
- SIR के फैसलों की संवैधानिक वैधता जांचने की मांग
- नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
- ऑनलाइन फॉर्म-6 में बदलाव पर आपत्ति
- सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बनाने का प्रस्ताव
- हटाए गए मतदाताओं का विवरण सार्वजनिक करने की मांग
- नोटिस और सुनवाई के बिना नाम नहीं हटाने की मांग
- पूरे देश में SIR पर अंतरिम रोक लगाने की मांग
- अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर INDIA गठबंधन के विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत विपक्ष के कई नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। विपक्ष की ओर से SIR प्रक्रिया और चुनाव संबंधी फैसलों पर अंतरिम रोक लगाने सहित कई राहतों की मांग करते हुए याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
याचिका में चुनाव आयोग से SIR से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने, प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता की जांच कराने और मतदाता सूची से हटाए गए नामों का स्वतंत्र ऑडिट कराने जैसी मांगें रखी गई हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
सुप्रीम कोर्ट तक निकाला विरोध मार्च
सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेताओं ने विरोध मार्च निकाला। इसमें कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेताओं के शामिल होने की जानकारी दी गई।
इससे पहले, रविवार को विपक्षी प्रतिनिधिमंडल और मुख्य न्यायाधीश के बीच मुलाकात नहीं हो सकी थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण मुलाकात से इनकार किया गया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए संयुक्त याचिका दायर करने का कदम उठाया।
SIR से जुड़े सभी दस्तावेज पेश करने की मांग
याचिका में चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह 24 जून 2025 से शुरू हुई SIR प्रक्रिया से संबंधित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करे। इनमें फाइलें, समझौते, बैठकों का विवरण, आपत्तियों के रिकॉर्ड, ECINET और ERONET के एक्सेस लॉग तथा फाइल नोटिंग्स शामिल हैं।
विपक्ष का कहना है कि इन दस्तावेजों के परीक्षण से प्रक्रिया के संचालन, निर्णय लेने के तरीके और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की पारदर्शिता का आकलन किया जा सकेगा।
SIR के फैसलों की संवैधानिक वैधता जांचने की मांग
याचिका में मांग की गई है कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों की संवैधानिक और कानूनी वैधता की जांच की जाए। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 324, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 तथा टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ (1995) मामले में निर्धारित कानूनी मानकों का हवाला दिया गया है।
विपक्ष ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में कोई निर्णय कानूनी अधिकार के बिना लिया गया पाया जाता है, तो उसे निरस्त करने पर विचार किया जाए।
नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
याचिका में मतदाता सूची तैयार करने के दौरान कथित तौर पर संवैधानिक और कानूनी नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
इसके अलावा, आयोग को शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करने और अपने निर्णयों का उचित रिकॉर्ड रखने का निर्देश देने की मांग भी की गई है।
ऑनलाइन फॉर्म-6 में बदलाव पर आपत्ति
विपक्ष ने ऑनलाइन फॉर्म-6 को मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में निर्धारित प्रारूप के अनुरूप बनाने की मांग की है। याचिका के अनुसार, निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना फॉर्म में ऐसे बदलाव नहीं किए जाने चाहिए, जिनका असर मतदाता पंजीकरण पर पड़ सकता है।
फॉर्म-6 का उपयोग मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है। ऐसे में विपक्ष ने इसकी प्रक्रिया को स्पष्ट और नियमों के अनुरूप रखने पर जोर दिया है।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति बनाने का प्रस्ताव
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है। प्रस्तावित समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को शामिल करने की बात कही गई है।
समिति के संभावित कार्यों में निम्नलिखित शामिल होंगे:
- SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए या बदले गए नामों का ऑडिट करना।
- ECINET और ERONET डेटाबेस की जांच करना।
- इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के इस्तेमाल, डिजाइन, आर्किटेक्चर और प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा करना।
- निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का अध्ययन करना।
हटाए गए मतदाताओं का विवरण सार्वजनिक करने की मांग
विपक्ष ने SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों, नाम हटाने के कारणों तथा संबंधित मतदाताओं की उम्र और लिंग के आधार पर बूथवार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
इसके साथ ही योग्य मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग भी उठाई गई है, ताकि पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहें।
नोटिस और सुनवाई के बिना नाम नहीं हटाने की मांग
याचिका में कहा गया है कि किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाने से पहले उसे कानूनी नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले।
विपक्ष ने पंजाब सहित अन्य चुनावी राज्यों में पात्र नागरिकों को निर्धारित कट-ऑफ तारीख तक आवेदन करने का अवसर देने की मांग भी की है।
पूरे देश में SIR पर अंतरिम रोक लगाने की मांग
विपक्ष की प्रमुख मांगों में याचिका पर अंतिम निर्णय आने तक देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाना शामिल है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अन्य उपयुक्त आदेश जारी कर सकता है।
अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर
SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाई गई मांगों के बाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख पर नजर रहेगी। हालांकि, याचिका में की गई मांगें अदालत के अंतिम निष्कर्ष या आदेश के समान नहीं हैं। मामले में किसी भी अंतरिम राहत, सुनवाई या अंतिम फैसले की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक न्यायालयी रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।
