Bengaluru SIR Protest: कर्नाटक के बेंगलुरु में सोमवार, 12 अक्टूबर को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर धक्का-मुक्की और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी का आरोप लगाया। वहीं, प्रदर्शन की कवरेज कर रहे फोटो जर्नलिस्ट्स के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया है। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थल पर जाने के लिए कहा गया था और मीडिया के साथ टकराव अनजाने में हुआ।
SIR के खिलाफ मार्च से पहले प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
बेंगलुरु में प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय तक मार्च निकालने के लिए एकत्र हुए थे। यह प्रदर्शन दिल्ली में SIR के खिलाफ आंदोलन कर रहे लोगों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया गया था।
प्रदर्शन में छात्र, वकील, एक्टिविस्ट और शिक्षाविद समेत कई लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मतदाता सूची के SIR को रद्द किया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।
एक्टिविस्ट समूह ‘माई वोट, माई राइट’ के अनुसार, मार्च शुरू होने से पहले ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। समूह ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्लेकार्ड जब्त किए और प्रदर्शनकारियों को धक्का देकर बसों में बैठाया।
सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों पर भी आरोप
प्रदर्शन के दौरान SJP कॉलेज के बाहर सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। यह स्थान कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के सामने और फ्रीडम पार्क से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है।
प्रदर्शनकारी समूह ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने युवाओं के साथ मारपीट की और महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़े खींचे। वकील विनय श्रीनिवासा ने भी पुलिस पर बल प्रयोग करने का आरोप लगाया।
उनके अनुसार, कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के बाद CAR ग्राउंड्स में छोड़ दिया गया। ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस के राष्ट्रीय महासचिव क्लिफ्टन रोजारियो के साथ भी मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया।
पुलिस कार्रवाई की कवरेज कर रहे पत्रकारों को भी बनाया निशाना
बेंगलुरु में प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला भी सामने आया। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर रहे फोटो जर्नलिस्ट्स ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उन्हें कवरेज करने से रोकने की कोशिश की।
रिपोर्टों के मुताबिक, एक फोटो जर्नलिस्ट के साथ चार पुलिसकर्मियों ने मारपीट की, जबकि तीन अन्य पत्रकारों के साथ भी बदसलूकी किए जाने का आरोप है।
एक पत्रकार ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने छात्रों के एक समूह के साथ कार्रवाई की और जब पत्रकारों ने इसे रिकॉर्ड करना शुरू किया तो उन्हें फुटेज डिलीट करने के लिए कहा गया।
पत्रकार के अनुसार, रिकॉर्डिंग जारी रखने पर एक फोटो जर्नलिस्ट को धमकी दी गई और पीटा गया। एक अन्य पत्रकार को धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया गया। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसका फोन छीनकर दूर फेंक दिया, कॉलर खींचा और पैर पर भी मारा। एक अधिकारी ने उसे जेल भेजने की धमकी भी दी।
पत्रकारों ने यह भी कहा कि घटनास्थल पर महिला पुलिसकर्मियों की संख्या कम थी और पुरुष पुलिसकर्मी ही महिला प्रदर्शनकारियों को संभाल रहे थे।
दिल्ली में SIR विरोधी प्रदर्शन पर कार्रवाई के खिलाफ था आंदोलन
बेंगलुरु में यह प्रदर्शन दिल्ली में SIR के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों, वकीलों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया गया था।
प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उनका कहना था कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
इसी दिन कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे भी दिल्ली में SIR और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध जता रहे थे।
सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल
बेंगलुरु में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की घटना के बाद सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्रवाई की आलोचना हुई।
अशोका यूनिवर्सिटी में राइटिंग की एसोसिएट प्रोफेसर अर्पिता दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे को टैग करते हुए दावा किया कि उनकी बेटी और उसकी दोस्त को SIR विरोधी प्रदर्शन में शामिल होने के दौरान हिरासत में लिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस शासित राज्य में युवाओं को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में क्यों लिया जा रहा है।
वहीं, प्रतीक वाघरे ने पुलिस कार्रवाई का वीडियो साझा करते हुए कर्नाटक सरकार के रवैये पर सवाल उठाए और प्रियांक खरगे को टैग किया। सोशल मीडिया पर कई अन्य लोगों ने भी हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को लेकर चिंता जताई।
बेंगलुरु पुलिस ने क्या कहा?
बेंगलुरु के सेंट्रल डिवीजन के डीसीपी अक्षय एम. हकाय ने बताया कि केआर सर्कल के पास प्रदर्शनकारी बिना अनुमति के एकत्र हुए थे। पुलिस ने उन्हें निर्धारित प्रदर्शन स्थल फ्रीडम पार्क जाने के लिए कहा, लेकिन उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों ने निर्देश का पालन नहीं किया।
डीसीपी ने कहा कि इसके बाद प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने संयम बरता और पत्रकारों तथा पुलिसकर्मियों के बीच टकराव तनावपूर्ण परिस्थितियों में अनजाने में हुआ।
बेंगलुरु सिटी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करने और निर्धारित स्थल फ्रीडम पार्क में ही प्रदर्शन करने की अपील की।
फिलहाल, इस घटना में प्रदर्शनकारियों और पत्रकारों की ओर से पुलिस पर लगाए गए आरोपों तथा पुलिस के बयान के बीच टकराव सामने आया है।
