जुआ संरक्षण और वसूली के आरोपों की शिकायत के बाद हुई रवानगी, दूसरे थाने या जोन में भेजने के बजाय एसओजी में मिली तैनाती
2019 में ट्रेनिंग के बाद सिकंदरा थाने में मिली थी पहली पोस्टिंग, मामला मीडिया में आने के बाद रविवार को हुई रवानगी
अग्र भारत संवाददाता, पीतम शर्मा
आगरा। थाना सिकंदरा में करीब सात साल से लगातार तैनात सिपाही भूरा सिंह की कार्यप्रणाली और लंबे समय तक एक ही थाने में तैनाती का मामला सुर्खियों में आने के बाद आखिरकार उनकी रवानगी कर दी गई। हालांकि, उनकी नई तैनाती ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। थाना सिकंदरा से हटाए गए सिपाही को किसी दूसरे थाने या जोन में भेजने के बजाय नगर जोन की एसओजी में तैनाती दे दी गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह कार्रवाई महज तबादला है या फिर सिपाही को एक तरह से इनाम दिया गया है? क्षेत्र में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे सिपाही के कथित रसूख और राजनीतिक पहुंच से जोड़कर भी देख रहे हैं।
जुआ संरक्षण, कथित वसूली और अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों से सांठगांठ के आरोपों को लेकर पुलिस आयुक्त से शिकायत की गई थी। शिकायत और मामला मीडिया में आने के बाद रविवार को सिपाही की थाना सिकंदरा से रवानगी की गई। सूत्रों के अनुसार, उन्हें नगर जोन की एसओजी में तैनाती दी गई है। ऐसे में सवाल है कि करीब सात साल तक एक ही थाने में तैनात रहने वाले सिपाही को हटाने के पीछे प्रशासनिक मंशा क्या रही? क्या यह कदम शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया या केवल थाना बदलकर औपचारिकता पूरी कर दी गई?
सूत्रों के मुताबिक, फरवरी 2019 में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भूरा सिंह की पहली पोस्टिंग थाना सिकंदरा में हुई थी। इसके बाद से वह लगातार इसी थाने में तैनात रहे। शिकायत में बाईपुर और ककरैठा क्षेत्र में कथित जुआ संचालन, ककरैठा स्थित वनखंडी महादेव मंदिर के आसपास अवैध गतिविधियों और अवैध फाइनेंस कर्मियों से जुड़े लोगों को संरक्षण देने के आरोप लगाए गए थे।संबंधित क्षेत्र से जुआ होते हुए वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर वायरल है,इन गतिविधियों के एवज में कथित वसूली की आशंका भी जताई गई थी। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।शिकायतकर्ता ने पुलिस आयुक्त को भेजे प्रार्थना पत्र में वर्ष 2019 से अब तक की तैनाती का रिकॉर्ड खंगालने के साथ सिपाही के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल और कथित संपर्कों की जांच कराने की मांग की थी। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि वर्ष 2024 में तत्कालीन एसीपी स्तर से सिपाही को कार्यालय से संबद्ध किया गया था, लेकिन बाद में उनकी दोबारा थाना सिकंदरा में तैनाती हो गई। इस पूरे प्रकरण में सिपाही की लंबे समय तक एक ही थाने में तैनाती के प्रशासनिक आधार पर भी सवाल उठाए गए थे।अब थाना सिकंदरा से रवानगी के बाद नगर जोन की एसओजी में तैनाती किए जाने से शिकायतकर्ता की मांग और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई के बीच अंतर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यदि सिपाही पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करानी है तो क्या नई तैनाती के दौरान भी इसकी समीक्षा की जाएगी? साथ ही, क्या सात साल तक एक ही थाने में तैनाती के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी?फिलहाल, सिपाही पर लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। उनकी नई तैनाती के प्रशासनिक आधार और शिकायत पर की गई कार्रवाई को लेकर पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
