आगरा के ताज की मंडी पुनिया पाड़ा में अनूप अग्रवाल से संबंधित निर्माण पर ADA ने नोटिस जारी किए। निर्माण बंद करने के आदेश के बाद भी काम जारी रहने के आरोप, अब सीलिंग की तैयारी।
आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) का प्रवर्तन विभाग शहर में अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी संभालता है, लेकिन ताज की मंडी के पुनिया पाड़ा में सामने आया मामला विभाग की निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यहां अनूप अग्रवाल से संबंधित निर्माण के मामले में एडीए की ओर से नोटिस जारी किए गए, निर्माण बंद करने के निर्देश भी दिए गए, लेकिन आरोप है कि इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा।
अब प्राधिकरण की ओर से सीलिंग की कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब निर्माण की जानकारी विभाग को पहले से थी और संबंधित व्यक्ति को नोटिस भी जारी किया जा चुका था, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
दिसंबर 2025 में जारी हुआ था पहला नोटिस
मामला लोहमंडी वार्ड के ताज की मंडी स्थित पुनिया पाड़ा का है। एडीए के दस्तावेजों के मुताबिक, अनूप अग्रवाल से संबंधित निर्माण को लेकर प्रवर्तन अनुभाग ने 26 दिसंबर 2025 को सीलिंग से पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
इसके बाद 12 फरवरी 2026 को एक और पत्र जारी किया गया। इसमें प्राधिकरण ने उल्लेख किया कि निर्माण की स्वीकृति के संबंध में संबंधित व्यक्ति की ओर से कोई जवाब अथवा स्वीकृति प्रस्तुत नहीं की गई है।
एडीए ने इसी पत्र के माध्यम से निर्माण कार्य तत्काल बंद करने और परिसर खाली करने के निर्देश दिए थे। साथ ही तीन दिन के भीतर सूचना देने को कहा गया था। आदेश का पालन नहीं होने पर परिसर सील करने की चेतावनी भी दी गई थी।
नोटिस जारी हुआ, फिर निर्माण पर रोक क्यों नहीं लगी?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एडीए को निर्माण की जानकारी थी और विभाग ने खुद निर्माण बंद करने का आदेश दिया था, तो उसके बाद मौके पर क्या निगरानी की गई?
यदि संबंधित व्यक्ति ने निर्धारित समय में जवाब नहीं दिया था, तो प्राधिकरण ने आगे की कार्रवाई कब की? क्या अधिकारियों ने दोबारा स्थल निरीक्षण किया? यदि निर्माण जारी पाया गया तो उसे तत्काल रुकवाने के लिए क्या कदम उठाए गए?
ये सवाल केवल एक निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एडीए की प्रवर्तन व्यवस्था की प्रभावशीलता और अधिकारियों की जवाबदेही से भी जुड़े हैं।
अधिकारी बोले- नोटिस के बाद अब होगी कार्रवाई
मामले में क्षेत्रीय अधिकारी का कहना है कि पिछले सप्ताह नोटिस जारी किया गया है और अब इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी के मुताबिक, संबंधित संपत्ति के पीछे की ओर बनाए जा रहे अन्य मकानों को भी नोटिस जारी किए गए हैं।
वहीं, एडीए के एक अधिकारी का कहना है कि फ्लैट्स के संबंध में पहले ही सीलिंग के नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब सीलिंग की कार्रवाई की जानी है। अधिकारी के अनुसार, नोटिस में दी गई समय-सीमा बुधवार को पूरी हो रही है।
अधिकारियों के इन बयानों के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्राधिकरण वास्तव में मौके पर पहुंचकर सीलिंग की कार्रवाई कब करता है।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई में देरी से उठे संरक्षण के सवाल
शहर में आम नागरिकों को निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत कराने और निर्धारित नियमों का पालन करने की बाध्यता होती है। ऐसे में यदि किसी निर्माण के संबंध में नोटिस जारी होने के बाद भी काम जारी रहने की शिकायत सामने आती है, तो यह विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े करती है।
यह भी जांच का विषय है कि नोटिस जारी होने के बाद निर्माण कार्य की निगरानी किस अधिकारी के जिम्मे थी और आदेश का पालन नहीं होने पर आगे की कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
हालांकि, किसी व्यक्ति को संरक्षण मिलने या अधिकारियों की मिलीभगत होने की पुष्टि अभी उपलब्ध तथ्यों से नहीं होती। इसकी जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है।
अब सीलिंग के साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी जरूरी
ताज की मंडी के पुनिया पाड़ा में सामने आए इस मामले में अब एडीए के सामने दोहरी जिम्मेदारी है। पहली, निर्माण की वैधता की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करना और दूसरी, यह पता लगाना कि नोटिस जारी होने के बावजूद निर्माण पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग सकी।
यदि निर्माण नियमों के विपरीत पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही नोटिस जारी होने के बाद निगरानी और कार्रवाई में हुई देरी की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
अब देखना होगा कि एडीए इस मामले में सिर्फ नोटिस और चेतावनी तक सीमित रहता है या वास्तव में मौके पर सीलिंग की कार्रवाई कर अपनी प्रवर्तन व्यवस्था की जवाबदेही भी सुनिश्चित करता है।

