लालकृष्ण आडवाणी 99 साल के हो गए और जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश किया। जानिए कराची में जन्म, 1990 की रथ यात्रा, अटल सरकार में भूमिका और भारत रत्न से सम्मानित होने तक का सफर।
- Lal Krishna Advani Birthday: 99 साल के हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता
- बंटवारे की त्रासदी को करीब से देखा, RSS से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
- 1990 की रथ यात्रा ने बदल दी भारतीय राजनीति की दिशा
- अटल सरकार में गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री की संभाली जिम्मेदारी
- 2005 में पाकिस्तान पहुंचे तो कराची के पुराने घर को देखकर हुए भावुक
- पुराने बेड और अलमारी को देखकर रह गए थे हैरान
- पद्म विभूषण और भारत रत्न से सम्मानित हुए आडवाणी
- पीएम नरेंद्र मोदी ने दी जन्मदिन की बधाई, योगदान को बताया चिरस्थायी
Lal Krishna Advani Birthday: भाजपा के वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी रविवार, 8 नवंबर को 99 वर्ष के हो गए। उनका जन्म 8 नवंबर 1927 को अविभाजित भारत के कराची में हुआ था। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। आडवाणी का राजनीतिक सफर भारतीय राजनीति के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण रहा है। 2005 में पाकिस्तान यात्रा के दौरान जब वह अपने बचपन के घर पहुंचे थे, तब पुरानी यादें ताजा कर भावुक हो गए थे।
Lal Krishna Advani Birthday: 99 साल के हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता
भारतीय राजनीति के दिग्गज नेताओं में शुमार लालकृष्ण आडवाणी ने रविवार को अपना 99वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर उन्होंने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश किया। आठ नवंबर 1927 को अविभाजित भारत के कराची शहर में जन्मे आडवाणी ने देश की राजनीति में कई महत्वपूर्ण पड़ाव देखे हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में देश के गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री रहे।
एक सिंधी हिंदू परिवार में जन्मे आडवाणी का जीवन देश के विभाजन, राजनीतिक बदलावों और भारतीय लोकतंत्र के कई ऐतिहासिक दौर का साक्षी रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में संगठन निर्माण से लेकर केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने तक लंबा सफर तय किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत पहचान दिलाने वाले नेताओं में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
बंटवारे की त्रासदी को करीब से देखा, RSS से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म ऐसे समय में हुआ था, जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था। बचपन कराची में बीता, लेकिन 1947 में देश के विभाजन के बाद उन्हें अपने परिवार के साथ भारत आना पड़ा। विभाजन के दौरान हुए सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल को उन्होंने करीब से देखा।
आडवाणी कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे। इसके बाद वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना के साथ वह इसके राजनीतिक और संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय हो गए। आगे चलकर वह भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख संस्थापकों और रणनीतिक नेताओं में शामिल हुए।
उन्होंने कई बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। उनके नेतृत्व और संगठनात्मक क्षमता ने पार्टी को देश के अलग-अलग हिस्सों में मजबूत आधार बनाने में मदद की।
1990 की रथ यात्रा ने बदल दी भारतीय राजनीति की दिशा
लालकृष्ण आडवाणी के राजनीतिक जीवन में वर्ष 1990 की रथ यात्रा को एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली थी। इस यात्रा ने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक राजनीतिक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
रथ यात्रा के बाद देश की राजनीति में भाजपा का प्रभाव तेजी से बढ़ा। आडवाणी पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए। संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और पार्टी की राजनीतिक पहुंच बढ़ाने में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा।
अटल सरकार में गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री की संभाली जिम्मेदारी
लालकृष्ण आडवाणी ने भाजपा के संगठनात्मक विस्तार के साथ-साथ केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने गृह मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
वर्ष 2002 में वह देश के उपप्रधानमंत्री बने और 2004 तक इस पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने गृह मंत्रालय सहित सरकार के महत्वपूर्ण कामकाज में अपनी भूमिका निभाई। अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की जोड़ी को भाजपा के राजनीतिक विस्तार के दौर की सबसे प्रभावशाली जोड़ियों में गिना जाता है।
2005 में पाकिस्तान पहुंचे तो कराची के पुराने घर को देखकर हुए भावुक
लालकृष्ण आडवाणी के जीवन का एक बेहद भावुक प्रसंग वर्ष 2005 की पाकिस्तान यात्रा से जुड़ा है। जून 2005 में जब वह पाकिस्तान पहुंचे तो अपने जन्मस्थान कराची भी गए थे। यहां वह उस पुराने इलाके में पहुंचे, जहां उनका बचपन बीता था।
उनका परिवार कराची की पारसी कॉलोनी में रहता था। रिपोर्टों के मुताबिक, अपने पुराने घर पहुंचकर आडवाणी काफी भावुक हो गए थे। लगभग छह दशक बाद जन्मभूमि पर लौटने का अनुभव उनके लिए बेहद खास था।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया था कि अपने जन्मस्थान पर वापस आकर उन्हें बचपन की पुरानी यादें ताजा हो गईं। जिस जगह उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती वर्ष बिताए थे, वहां पहुंचना उनके लिए भावनात्मक क्षण था।
पुराने बेड और अलमारी को देखकर रह गए थे हैरान
कराची यात्रा के दौरान आडवाणी जिस मकान में पहुंचे थे, वह दो मंजिला था। हालांकि इतने वर्षों में मकान का स्वरूप काफी बदल चुका था। इसके बावजूद वहां मौजूद कुछ पुरानी चीजों ने उन्हें बचपन की याद दिला दी।
अपने पुराने मोहल्ले और घर को देखकर उन्होंने अपने शुरुआती जीवन के कई प्रसंग याद किए। बताया जाता है कि घर में मौजूद पुराने बेड और अलमारी को देखकर भी वह हैरान रह गए थे।
विभाजन के बाद जिस शहर को छोड़कर उन्हें भारत आना पड़ा था, वहां छह दशक से अधिक समय बाद वापस पहुंचना उनके लिए केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि अतीत से जुड़ने का अवसर भी था।
पद्म विभूषण और भारत रत्न से सम्मानित हुए आडवाणी
देश और भारतीय राजनीति में उनके लंबे योगदान को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया।
- 2015: भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया।
- 2024: उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
भारत रत्न से सम्मानित किए जाने के बाद उनके राजनीतिक योगदान और लंबे सार्वजनिक जीवन की व्यापक चर्चा हुई। यह सम्मान भारतीय राजनीति में उनके दशकों लंबे सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने दी जन्मदिन की बधाई, योगदान को बताया चिरस्थायी
लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उनके लंबे राजनीतिक जीवन और देश के प्रति योगदान को याद किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आडवाणी का देश के प्रति योगदान चिरस्थायी है। उन्होंने कई दशकों तक चले उनके उल्लेखनीय राजनीतिक सफर, संगठनात्मक भूमिका और सरकार में दी गई सेवाओं को नमन किया।
पीएम मोदी ने इस विशेष अवसर पर आडवाणी के जीवन और योगदान पर एक लेख भी लिखा। इसमें उनके राजनीतिक संघर्ष, भाजपा के निर्माण और देश की सेवा में निभाई गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को याद किया गया।
लालकृष्ण आडवाणी का 99 साल का जीवन भारतीय राजनीति के कई ऐतिहासिक अध्यायों का साक्षी रहा है। कराची में जन्म से लेकर भारत के उपप्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित होने तक का उनका सफर देश की राजनीतिक यात्रा से गहराई से जुड़ा रहा है।
