अंबेडकरनगर । SDO कटेहरी मनोज कुमार के पदभार ग्रहण करने के पहले सप्ताह से ही साहब के खिलाफ शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंचने लगी थी। जैसे-जैसे समय बीतता गया उसी के साथ महोदय के ऑफिस में फाइलों का अंबार लगता चला गया। इनके कार्यकाल में शिकायतकर्ताओं को सिर्फ एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस तक बार-बार चक्कर लगवाया जाता रहा है, लेकिन निस्तारण के नाम पर आंकड़ा दस प्रतिशत से भी कम है । इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता यदि कई बार साहब के ऑफिस का चक्कर लगाने के बाद कार्य से संतुष्ट नहीं है और उसके संदर्भ में साहब से कोई प्रश्न पूछ ले तो साहब द्वारा शिकायतकर्ता को FIR की धमकी दे दी जाती थी। FIR वाली धमकी का सिलसिला सिर्फ शिकायतकर्ताओं तक ही सीमित नहीं था | वर्तमान समय में इसका दायरा एसडीओ के खिलाफ खबर लिखने वाले पत्रकारों तक बढ़ गया था।
कटेहरी वाले चर्चित फॉल्ट प्रकरण में जेई कटेहरी की कार्य कुशलता एवं लोकप्रियता से बौखलाहट में SDO
कटेहरी का चर्चित फॉल्ट प्रकरण जो पूर्ण रूप से पांचवें दिन जाकर ठीक हुआ, उस प्रकरण के दौरान जिस प्रकार से जेई कटेहरी ने अपने उच्च अधिकारियों के सहयोग एवं एसडीओ कटेहरी के कार्य करने के तरीके से नाखुश, कार्य का बहिष्कार करने वाले संविदा कर्मियों से सामंजस्य बनाकर विद्युत फाल्ट को दूर कराया, वह कहीं ना कहीं एसडीओ कटेहरी को खटक रहा है । शायद साहब को यह गुमान था की दबाव बनाकर, पद का धौस दिखाकर अपने निचले क्रम के कर्मचारियों से काम करवा लेंगे। लेकिन साहब को शायद एथिक्स की समझ थोड़ी कम है। जिसकी वजह से वह इस पूरे प्रकरण में फेल दिखे हैं। क्षेत्र वासियों की नजरों में साहब हीरो बनने का प्रयास कर रहे थे लेकिन यहां पर बाजी जेई कटेहरी धर्मेंद्र कुमार तिवारी ने मार ली | इसी वजह से अब मनोज कुमार जेई कटेहरी के तबादले के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
क्षेत्रवासियों की मांग SDO का हो तबादला
कटेहरी बाजार के व्यापारियों एवं क्षेत्र वासियों की लंबे समय से यह मांग है कि एसडीओ कटेहरी का तबादला किया जाए। जिससे आम जनमानस की शिकायतों का निस्तारण समयबद्ध तरीके से हो सके। क्षेत्र वासियों का यह भी कहना है कि अभी तक कई सारे एसडीओ कटेहरी में तैनात रहे लेकिन शिकायतकर्ताओं के साथ इतनी अभद्रता, कार्य में लेटलतीफी, शिकायतकर्ताओं को धमकी जैसा कृत किसी भी अधिकारी द्वारा नहीं किया गया है। इस संबंध में अभी तक दो दर्जन से अधिक शिकायतें यूपीपीसीएल से लेकर मध्यांचल विद्युत निगम लिमिटेड तक मेल के माध्यम से की गई हैं लेकिन कार्यवाही के नाम पर अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है।
अपने पॉलीटिकल कनेक्शंस के चलते कार्यवाही से बचे हुए हैं SDO
पिछले दो माह से लगातार शिकायतों के बाद भी कोई अधिकारी यदि पद पर बना हुआ है तो निश्चित तौर पर सत्ता पक्ष से पॉलिटिकल कनेक्शन होना लाजमी है। ऐसा ही मामला SDO कटेहरी का है। साहब ने अपना बैकअप प्लान पहले ही तैयार कर रखा था, कहां जाना है, किस दरबार में हाजिरी देनी है, जिससे समय आने पर अपना बचाव किया जा सके। यह एसडीओ कटेहरी को पोस्टिंग के तुरंत बाद ही समझ में आ गया था और इस तरह से उन्होंने अपने राजनीतिक संबंध बनाए । जिसकी बदौलत सैकड़ो शिकायतों के बाद भी आज मंडल तक के उच्च अधिकारी साहब पर कार्रवाई करने से बचते हैं। लेकिन संरक्षण देने वालों को शायद आगामी विधानसभा उपचुनाव नहीं दिख रहा है क्योंकि यदि साहब लंबे समय तक जिले में बने रहते हैं तो निश्चित तौर पर नुकसान सत्ता पक्ष का होना तय है।
यदि SDO का हुआ तबादला तो उनके चमचों का क्या होगा
स्थानीय लोगों के दबाव के चलते यदि जेई के तबादले के प्रयास में लगे एसडीओ का ही ट्रांसफर हो जाता है तो उनकी चमचागिरी करने वाले मुट्ठी भर कर्मचारियों का क्या होगा ? यह भी देखना दिलचस्प रहेगा। ये वही कर्मचारी हैं जिनको एसडीओ साहब एडवांस में उपस्थित दिखाने के चक्कर में अपनी फजीहत कर बैठे थे और कहीं ना कहीं कर्मचारियों में रोष और गुटबाजी यहीं से प्रारंभ हुई थी। यह वही प्रकरण है जिसमें फील्ड पर वर्क करने वाले कई कर्मचारियों को कई दिनों तक अनुपस्थित तथा घर पर बैठकर साहब की चापलूसी करने वाले को एडवांस में उपस्थित दिखाया गया था। निश्चित तौर पर यदि एसडीओ का ट्रांसफर होता है तो चमचागिरी करने वालों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा।
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