अग्र भारत ब्यूरो
प्रयागराज, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का पवित्र संगम होता है, महाकुंभ 2025 के पहले शाही स्नान के ऐतिहासिक और दिव्य क्षण का साक्षी बना। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फोटोग्राफर अर्पित शुक्ला ने अपनी कलात्मक और संवेदनशील दृष्टि से इस अलौकिक आयोजन को अपनी तस्वीरों में अमर कर दिया।
संगम की पावन छटा -The Sacred Splendor of Sangam

तीन पवित्र नदियों के मिलन स्थल संगम पर लाखों श्रद्धालु आस्था और भक्ति के दीप जलाए एकत्रित हुए।

हर किसी की आँखें उस दिव्य और प्रतीक्षित क्षण पर टिकी थीं, जब सूर्य की पहली किरणें गंगा की लहरों को स्पर्श कर उन्हें स्वर्णिम आभा से भर रही थीं। अर्पित शुक्ला ने इन अद्भुत और मनोहारी नज़ारों को अपनी तस्वीरों में अत्यंत बारीकी और कुशलता से कैद किया, मानो वे स्वयं उस दिव्य क्षण का हिस्सा हों।
नागा साधुओं की भव्यता – The Grandeur of Naga Sadhus

अखाड़ों के नागा साधुओं का संगम की ओर बढ़ता हुआ भव्य जुलूस दृश्य को अलौकिक और दिव्य बना रहा था। उनके भस्म से सजे हुए शरीर, हाथों में त्रिशूल और डमरू की गूंज, और उनके ओजस्वी और शक्तिशाली जयघोष ने पूरे वातावरण को दिव्यता और भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।

अर्पित ने अपनी तस्वीरों में न केवल इन साधुओं की अटूट भक्ति और कठोर तपस्या को जीवंत रूप दिया, बल्कि उनकी अनोखी जीवनशैली की अनकही कहानियों को भी दुनिया के सामने लाया।
श्रद्धालुओं की असीम आस्था – The Immense Faith of the Devotees

संगम के पवित्र तट पर डुबकी लगाते हुए श्रद्धालुओं के चेहरे पर संतोष, शांति और अपार श्रद्धा की भावना साफ़ झलक रही थी। अर्पित ने इन पवित्र क्षणों को अपने कैमरे में इस प्रकार कैद किया कि हर तस्वीर एक अलग और मार्मिक कहानी कहती है।

कहीं एक वृद्धा मोक्ष की कामना में डुबकी लगा रही थी, तो कहीं एक युवा अपने जीवन की नई शुरुआत की आशा में ध्यानमग्न था।
अनुभूतियाँ और अनुभव – Experiences and Feelings

अपनी इस यात्रा के दौरान अर्पित ने कई साधुओं और श्रद्धालुओं से बातचीत की और उनके अनुभवों को जानने का प्रयास किया। एक साधु ने कहा, “गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में डुबकी लगाना आत्मा को शुद्ध करने जैसा है। यह हमारी प्राचीन संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है।”

इन शब्दों ने अर्पित के दृष्टिकोण को और भी गहराई दी और उनकी तस्वीरों में इन भावनाओं का जीवंत और प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ।
अखाड़ों की परंपराएँ – Traditions of the Akharas

महाकुंभ में जूना, निरंजनी और महानिर्वाणी अखाड़ों ने अपनी प्राचीन शक्ति, वैभव और समृद्ध परंपराओं का अद्भुत और प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इन अखाड़ों की भव्य परेड और धार्मिक अनुष्ठानों को देखकर हर व्यक्ति प्रेरित और मंत्रमुग्ध महसूस कर रहा था। अर्पित ने इन अनमोल और ऐतिहासिक क्षणों को अपने कैमरे में कैद कर, उनकी अनूठी भव्यता और सांस्कृतिक विरासत को सजीव कर दिया।

महाकुंभ 2025 का पहला शाही स्नान अर्पित शुक्ला के लिए केवल एक फोटोग्राफी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक गहरा आत्मीय और आध्यात्मिक अनुभव था। उनकी तस्वीरें इस पवित्र आयोजन की महिमा, गहराई और सांस्कृतिक महत्व को बखूबी बयान करती हैं – गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम का अद्वितीय आकर्षण, नागा साधुओं की तपस्या और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था।
महाकुंभ 2025 की यह यात्रा अर्पित शुक्ला की संवेदनशील और कलात्मक नज़र से देखी गई एक ऐसी कहानी है, जो हर पाठक को आध्यात्मिकता, आस्था और भारतीय संस्कृति की गहराइयों तक ले जाती है।
