वाशिंगटन: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे संघर्ष और इस साल की शुरुआत में मिडिल ईस्ट में भड़की जंग के बीच अब भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। वाशिंगटन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हालिया मुलाकात ने दुनिया भर के रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। इस मुलाकात ने दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों में चल रहे युद्धों के आपस में जुड़ने और इसके खतरनाक परिणामों को लेकर गंभीर अटकलों को जन्म दे दिया है।
Key Highlights
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जेलेंस्की और नेतन्याहू की मुलाकात: वाशिंगटन में दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार के दौरान दोनों नेता मिले, जिससे वैश्विक कूटनीति में हलचल तेज हो गई है।
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1914 जैसे हालात की आशंका: कुछ इतिहासकारों और विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया प्रथम विश्व युद्ध से ठीक पहले यानी 1914 जैसे दौर की तरफ बढ़ रही है, जहां क्षेत्रीय संकट बड़े गठबंधन में बदल सकते हैं।
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कैस्पियन सागर में टकराव: यूक्रेनी सेना द्वारा कथित तौर पर रूस और ईरान के बीच सैन्य सामान ले जा रहे जहाजों पर हमले के बाद तनाव और गहरा गया है।
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रूस-ईरान की बढ़ती नजदीकियां: कीव का दावा है कि ईरान 2022 से रूस को ‘शाहिद ड्रोन’ और सैन्य तकनीक मुहैया करा रहा है, जिससे यूरोप और पश्चिम एशिया के युद्ध क्षेत्र आपस में घुलमिल गए हैं।
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डोनाल्ड ट्रंप का रुख: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस द्वारा ईरान को खुफिया मदद देने के दावों पर संयमित प्रतिक्रिया दी है और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस पर बात करने की बात कही है।
क्या रूस-ईरान के खिलाफ साथ लड़ेंगे इजरायल और यूक्रेन?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लगभग एक ही समय पर वाशिंगटन पहुंचे थे। वे दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को श्रद्धांजलि देने आए थे, जो ईरान के खिलाफ अमेरिका के सख्त रुख और रूस के खिलाफ यूक्रेन की नीतियों के बड़े समर्थक माने जाते थे।
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात ने व्हाइट हाउस को दो ऐसे संघर्षों के केंद्र में ला खड़ा किया है, जो अब स्वतंत्र न रहकर आपस में जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक सिर्फ राजनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक युद्ध के दायरे को और व्यापक बना सकती है।
दुनिया में बन रहे 1914 जैसे हालात
राजनीतिक विश्लेषकों और इतिहासकारों का एक वर्ग चेतावनी दे रहा है कि वैश्विक स्तर पर वैसे ही हालात बन रहे हैं जैसे 1914 में प्रथम विश्व युद्ध से पहले बने थे। अलग-अलग क्षेत्रीय संकटों का आपस में जुड़ना, गलत रणनीतिक अनुमान और तनाव का लगातार बढ़ना इस बात का संकेत है कि छोटे विवाद एक बड़े वैश्विक संघर्ष में तब्दील हो सकते हैं।
इन आशंकाओं के पीछे सबसे बड़ा कारण कैस्पियन सागर (दुनिया का सबसे बड़ा अंतर्देशीय जल निकाय) में शुरू हुआ नया सैन्य टकराव है।
यूक्रेन और ईरान आमने-सामने
हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने दावा किया कि उनकी सेना ने उन जहाजों को निशाना बनाया है जो रूस और ईरान के बीच सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति कर रहे थे। यूक्रेन की सुरक्षा सेवा के अनुसार, ईरानी ड्रोन और अन्य सैन्य सामग्री ले जाने वाले जहाजों पर हमले किए गए हैं।
इस दावे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यूक्रेन पर ईरानी जहाज पर हमला करने और एक नाविक की जान लेने का आरोप लगाया। अराघची ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
दूसरी ओर, यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने ईरान की चेतावनी को खारिज करते हुए कहा कि तेहरान के पास पीड़ित होने का दिखावा करने का कोई अधिकार नहीं है। कीव का आरोप है कि ईरान 2022 से लगातार मास्को को ‘शाहिद ड्रोन’ और घातक सैन्य तकनीक दे रहा है, जिसके कारण हजारों यूक्रेनी नागरिकों की जान गई है।
ट्रंप की कूटनीति और संतुलन बनाने की कोशिश
इन सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक तनाव को कम करने के लिए संतुलित रुख अपनाते दिख रहे हैं। जेलेंस्की द्वारा यह दावा किए जाने पर कि रूस ने शायद सैटेलाइट इंटेलिजेंस के जरिए अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने में ईरान की मदद की है, ट्रंप ने सतर्क प्रतिक्रिया दी।
सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि वे ऐसा कर रहे हैं, कम से कम ऊंचे स्तर पर तो बिल्कुल नहीं। अगर ऐसी कोई मदद दी भी गई थी, तो उसका असर बहुत कम रहा होगा।” ट्रंप का यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका फिलहाल स्थिति को और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए कूटनीतिक संतुलन साधने का प्रयास कर रहा है।
