कैंसर मरीजों को बड़ी राहत! NPPA ने 137 कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की सीमा तय की। 9 नवंबर से नई कीमतें लागू होंगी, कुछ दवाएं 96.45% तक सस्ती होंगी।
नई दिल्ली। कैंसर के इलाज पर होने वाले भारी खर्च से परेशान मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने 137 कैंसर रोधी दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर ट्रेड मार्जिन की सीमा निर्धारित की है। इसके चलते कई दवाओं की कीमतों में भारी कमी होने जा रही है। कुछ दवाओं के दाम 96.45 प्रतिशत तक घट सकते हैं। संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने यह फैसला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की ओर से 17 अक्टूबर को गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य कैंसर की महंगी दवाओं पर होने वाले अनावश्यक व्यापारिक मुनाफे को नियंत्रित करना और मरीजों को कम कीमत पर दवाएं उपलब्ध कराना है।
96.45 प्रतिशत तक घटेगी कैंसर की दवाओं की कीमत
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अब तक 76 दवा कंपनियों ने 121 दवाओं के अंतर्गत आने वाले कैंसर रोधी दवाओं के 1,225 फॉर्मूलेशन की संशोधित अधिकतम खुदरा कीमतों की जानकारी सरकार को दी है।
इनमें से 1,031 फॉर्मूलेशन के एमआरपी में कमी दर्ज की गई है। करीब 600 ब्रांडों की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की कटौती हुई है। वहीं, सबसे अधिक कीमत में कमी 96.45 प्रतिशत दर्ज की गई है।
इस फैसले से स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, फेफड़ों के कैंसर और सर्वाइकल कैंसर सहित कई प्रकार के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं सस्ती हो सकती हैं।
40 हजार रुपये की दवा 2,700 रुपये में मिलने की उम्मीद
सरकार की ओर से साझा किए गए उदाहरणों के मुताबिक, कुछ कैंसर रोधी दवाओं की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
- पैल्वोप्रो कैप्सूल: स्तन कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इस दवा की कीमत करीब 40,000 रुपये से घटकर 2,700 रुपये हो सकती है।
- एबिरोन: प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली अरविंदकेयर फार्मा की इस दवा की कीमत करीब 41,000 रुपये से घटकर 3,000 रुपये हो सकती है।
- डेनऑस्टियोरेल: रिलायंस लाइफ साइंसेज की इस दवा की कीमत करीब 24,000 रुपये से घटकर 6,000 रुपये हो सकती है।
- जाइडस लाइफसाइंसेज की दवा: फेफड़ों और सर्वाइकल कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा की कीमत में भी 96 प्रतिशत तक कमी की जानकारी दी गई है।
इन कीमतों में वास्तविक बदलाव संबंधित दवा के ब्रांड, फॉर्मूलेशन और पैक के आधार पर हो सकता है। मरीजों को खरीदारी से पहले संशोधित एमआरपी की पुष्टि करनी चाहिए।
दवा दुकानों और अस्पतालों को दिखानी होगी नई एमआरपी सूची
सरकार ने दवाओं की कीमतों में कटौती का लाभ सीधे मरीजों तक पहुंचाने के लिए खुदरा विक्रेताओं, डीलरों, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को निर्देश दिए हैं।
इसके तहत सभी संबंधित संस्थानों को कैंसर रोधी दवाओं की संशोधित एमआरपी सूची अपनी वेबसाइट और परिसर में प्रमुखता से प्रदर्शित करनी होगी। इससे मरीजों और उनके परिजनों को दवाओं की नई कीमतों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
एनपीपीए की अधिसूचना के अनुसार, राज्य औषधि नियंत्रक दवा निर्माताओं, डीलरों, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों द्वारा इन निर्देशों के पालन की निगरानी करेंगे।
क्या होता है ट्रेड मार्जिन? कैसे तय होती है दवा की कीमत
ट्रेड मार्जिन का मतलब निर्माता द्वारा वितरक को दवा जिस कीमत पर बेची जाती है और उपभोक्ता के लिए निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के बीच के अंतर से है।
इस अंतर में दवा की आपूर्ति और बिक्री से जुड़े वितरक तथा खुदरा विक्रेता का मुनाफा शामिल होता है। यदि ट्रेड मार्जिन बहुत अधिक होता है, तो दवा की अंतिम कीमत बढ़ सकती है और मरीजों को इलाज के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं।
सरकार की ओर से ट्रेड मार्जिन पर सीमा निर्धारित करने का उद्देश्य दवाओं की कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी रोकना और मरीजों को उचित दर पर दवाएं उपलब्ध कराना है।
कैंसर मरीजों के लिए क्यों अहम है सरकार का फैसला?
कैंसर का इलाज अक्सर लंबे समय तक चलता है। इसमें सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और महंगी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। कई मरीजों को लंबे समय तक नियमित रूप से दवाएं लेनी पड़ती हैं। ऐसे में दवाओं पर होने वाला खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति पर भारी पड़ता है।
137 कैंसर रोधी दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर नियंत्रण और एमआरपी में कमी से मरीजों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, हर मरीज को होने वाली बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कौन-सी दवा, किस ब्रांड और किस पैक में खरीद रहा है।
मरीजों के लिए जरूरी सलाह: दवा खरीदते समय नई एमआरपी जरूर जांचें। डॉक्टर की सलाह के बिना कैंसर की दवा का ब्रांड, खुराक या इलाज का तरीका न बदलें।
