केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को अमेरिकी डोनर्स और आशुतोष रांका को पाकिस्तानी नेताओं से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया। जानिए पूरा मामला।
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं की कथित विदेशी फंडिंग को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संस्थापक आशुतोष रांका पर विदेशी स्रोतों से आर्थिक मदद मिलने का आरोप लगाया है। मंत्री के मुताबिक, अभिजीत दीपके को अमेरिका स्थित डोनर्स से पैसा मिल रहा है, जबकि आशुतोष रांका को पाकिस्तान के नेताओं और अन्य लोगों से आर्थिक सहायता मिली है।
केंद्रीय मंत्री ने ये आरोप 3 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए। उन्होंने कथित विदेशी फंडिंग को भारत में सरकार विरोधी अभियानों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ चल रही मुहिम से जोड़ते हुए कई सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने वाले वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका पर क्या बोले जितेंद्र सिंह?
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संस्थापक आशुतोष रांका का नाम लेते हुए विदेशी फंडिंग का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि अभिजीत दीपके को अमेरिका में रहने वाले डोनर्स से आर्थिक मदद मिल रही है। वहीं, आशुतोष रांका को पाकिस्तानी नेताओं से भुगतान किया गया है और उन्हें अन्य माध्यमों से भी पैसा मिल रहा है।
मंत्री ने आरोप लगाया कि कुछ स्वयंभू नेता और एक्टिविस्ट विदेशी आर्थिक सहायता के जरिए देश में सरकार विरोधी माहौल बनाने और लोगों के बीच गलत नैरेटिव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
SIR के खिलाफ अभियान को भी विदेशी फंडिंग से जोड़ा
केंद्रीय मंत्री ने अपने आरोपों में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के खिलाफ चल रहे अभियान को कुछ विदेशी फंडिंग वाले संगठन, एनजीओ और अन्य समूह आर्थिक मदद दे रहे हैं।
जितेंद्र सिंह के मुताबिक, कुछ संगठन और विदेशी ताकतें मिलकर देश में चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियानों के पीछे काम करने वाले लोगों और संगठनों के आर्थिक स्रोतों की जांच होनी चाहिए।
FCRA कानून का किया बचाव
विदेशी फंडिंग के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विदेशी स्रोतों से आने वाले धन को नियंत्रित करने और उसके इस्तेमाल पर निगरानी रखने के लिए यह कानून महत्वपूर्ण है।
मंत्री के अनुसार, किसी भी संगठन या व्यक्ति को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसके अभियान और गतिविधियों के लिए पैसा कहां से आ रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग सार्वजनिक रूप से बड़े अभियान चलाते हैं, उन्हें अपने आर्थिक स्रोतों के बारे में पारदर्शिता रखनी चाहिए।
पहले भी सामने आ चुका है CJP की फंडिंग का मामला
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की विदेशी फंडिंग को लेकर इससे पहले भी सवाल उठ चुके हैं। अगस्त 2026 में दीपके ने अपनी अमेरिका में पढ़ाई के खर्च को लेकर सफाई देते हुए बताया था कि उन्हें बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप मिली थी और बाकी खर्च के लिए उन्होंने एजुकेशन लोन लिया था।
उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी की गतिविधियों के लिए क्राउडफंडिंग का सहारा लिया जाएगा और वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखी जाएगी।
अक्टूबर 2026 में अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने भी CJP को अमेरिकी डोनर्स से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में अभिजीत दीपके ने विदेशी हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए कहा था कि भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी लोगों को दखल नहीं देना चाहिए।
अब विदेशी फंडिंग के आरोपों पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के ताजा बयान के बाद CJP नेताओं की कथित विदेशी फंडिंग का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। खासतौर पर अमेरिका और पाकिस्तान से आर्थिक सहायता मिलने के आरोपों ने राजनीतिक बहस को नया विषय दे दिया है।
हालांकि, मंत्री के आरोपों और किसी स्वतंत्र जांच में साबित हुए तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है। फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों में कथित लेनदेन की पूरी जानकारी, रकम, संबंधित बैंकिंग रिकॉर्ड या किसी जांच एजेंसी की अंतिम पुष्टि सामने नहीं आई है।
ऐसे में अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका को लेकर लगाए गए आरोपों को जांच और प्रमाणित जानकारी सामने आने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
