जानें कौन हैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास। जंतर-मंतर नीट प्रदर्शन, खोजी पत्रकारिता, आरटीआई activism और उनकी आगामी किताब से जुड़ी पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक, परीक्षा में कथित अनियमितताओं और विभिन्न छात्र-युवा मुद्दों को लेकर हुए जोरदार प्रदर्शनों ने इन दिनों पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस आंदोलन के केंद्र में रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और इसके युवा चेहरे तेजी से राजनीतिक गलियारों की सुर्खियां बन चुके हैं। इस युवा-प्रधान पार्टी के मुख्य प्रवक्ता के रूप में जिस नाम ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, वे हैं स्वतंत्र खोजी पत्रकार सौरव दास।
अभिजीत दीपके (बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस के स्नातकोत्तर) के नेतृत्व वाली इस अनूठी पार्टी के साथ सौरव दास के जुड़ने और जंतर-मंतर के आंदोलन से लेकर सरकार के साथ उच्चस्तरीय बैठकों तक के सफर ने सबको चौंका दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कौन हैं सौरव दास और पत्रकारिता से लेकर राजनीतिक मंच तक उनका सफर कैसा रहा है।
कौन हैं सौरव दास? (Who is Saurav Das)
नई दिल्ली के निवासी सौरव दास मुख्य रूप से एक स्वतंत्र (फ्रीलांस) जांच पत्रकार, आरटीआई कार्यकर्ता और नागरिक मुद्दों के मुखर पैरोकार हैं। उनका पत्रकारिता और शोध का दायरा मुख्य रूप से कानून, शासन (Governance), न्यायपालिका, अपराध और संस्थागत पारदर्शिता जैसे गंभीर विषयों पर केंद्रित रहा है।
पार्टी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और सरकार के साथ संवाद के दौरान सौरव दास ने CJP के मुख्य प्रवक्ता के रूप में मीडिया और मंच पर पार्टी की नीतियों को बेहद प्रभावी ढंग से रखा है। इसके अलावा, वह जलवायु नीति से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय संगठन ‘क्लाइमेट एक्शन Front’ के सह-संस्थापक भी हैं।
मात्र 18 साल की उम्र से शुरू किया RTI का सफर
सौरव दास की शुरुआती पहचान एक जुझारू आरटीआई (RTI) एक्टिविस्ट के रूप में रही है। उन्होंने अपनी पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई एमिटी यूनिवर्सिटी से पूरी की। कॉलेज के शुरुआती दिनों में यानी वर्ष 2017 में, जब वह महज़ 18 वर्ष के थे, उन्होंने सार्वजनिक प्राधिकरणों से सूचनाएं मांगने के लिए सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम का प्रभावी ढंग से उपयोग करना शुरू कर दिया था।
उनके द्वारा आरटीआई के जरिए निकाले गए कई तथ्य और दस्तावेज राष्ट्रीय स्तर पर बड़े खुलासे बने, जिन्हें प्रमुख मीडिया घरानों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।
स्वतंत्र पत्रकारिता और बड़े प्रकाशनों में योगदान
वर्ष 2020 से पेशेवर पत्रकारिता में कदम रखने वाले सौरव दास ने देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के लिए काम किया है। उनके लेख और खोजी रिपोर्टें द कारवां (The Caravan), द वायर (The Wire), आर्टिकल 14 (Article 14), द हिंदू (The Hindu), अल जजीरा (Al Jazeera) और न्यू लाइन्स मैगजीन जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर छप चुकी हैं। उन्होंने ‘द वायर’ के लिए ‘द जस्टिस ब्रीफ विद सौरव दास’ नाम से एक चर्चित सीरीज भी होस्ट की थी।
उनकी रिपोर्टिंग में न्यायपालिका की कार्यप्रणाली, पीएमएलए (PMLA), ईडी (ED) की भूमिका और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे विषय मुख्य रूप से शामिल रहे हैं।
कोविड काल में कानूनी हस्तक्षेप और ऐतिहासिक कदम
महामारी के दौर में सौरव दास का काम खासा चर्चा में रहा था। कोविड-19 महामारी के दौरान जब सूचनाओं के आदान-प्रदान और आरटीआई अपीलों में भारी देरी हो रही थी, तब उन्होंने एक राज्य उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटया था। उनके इस कानूनी हस्तक्षेप के बाद केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को महामारी से जुड़े अत्यंत जरूरी सूचना अनुरोधों पर अपीलों की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश देना पड़ा था। इसके अलावा ‘आरोग्य सेतु’ ऐप के विकास और सोशल मीडिया पर सरकारी पाबंदियों से जुड़े मामलों में भी उन्होंने आरटीआई और कानूनी मंचों का उपयोग कर पारदर्शिता की मांग उठाई थी।
न्यायपालिका पर आ रही है पहली किताब
पत्रकारिता और सक्रियता के साथ-साथ सौरव दास इन दिनों अपनी पहली पुस्तक लेखन पर भी काम कर रहे हैं। उनकी इस आने वाली बहुचर्चित किताब का नाम ‘Complicit Silence: The Court’s Role in India’s Quiet Suffering’ है। यह पुस्तक भारतीय न्यायपालिका की भूमिका, न्याय की सुलभता और उन आम नागरिकों की कहानियों पर आधारित है जो न्याय पाने के लिए अदालतों की देहरी पर संघर्ष करते रहे हैं।
CJP के साथ राजनीतिक और सामाजिक मंच पर एंट्री
हाल ही में जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने नीट परीक्षा के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा मोर्चा खोला, तो पार्टी ने अपने तीन मुख्य प्रवक्ताओं के नामों की घोषणा की, जिसमें सौरव दास को मुख्य प्रवक्ता की जिम्मेदारी सौंपी गई। एक स्वतंत्र पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट से राजनीतिक आंदोलन के मुख्य चेहरे तक का यह सफर भारतीय राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में एक नया विषय बन गया है।

